नयी दिल्ली, 30 अप्रैल (वार्ता) विदेशी और घरेलू निवेशकों के बीच संपर्क सेतु की सुविधा प्रदान कर देश में निवेश को प्रोत्साहित करने वाली राष्ट्रीय गैरलाभकारी कंपनी इन्वेस्ट इंडिया ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 6.1 अरब डॉलर से अधिक मूल्य की 60 परियोजनाओं को शुरू करने में सहायता प्रदान की है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के अंतर्गत विदेशी निवेशकों को देश में निवेश के लिए प्रोत्साहन एवं सुविधा प्रदान करने वाली इस एजेंसी की सहायता से होने वाले 14 राज्यों में ये निवेश हुए हैं और इनसे 31,000 से अधिक संभावित रोजगार सृजित होने का अनुमानहै। यह जानकारी डीपीआईआईटी और इन्वेस्ट इंडिया के अधिकारियों ने गुरुवार को संवाददाताओं को दी।
अधिकारियों ने बताया कि इन्वेस्ट इंडिया की मदद से पिछले वित्त वर्ष में आये कुल निवेश का लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा यूरोपीय देशों से आया है जो भारत-यूरोप के मजबूत होते आर्थिक संबंधों को और मजबूती देता है। अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और अन्य प्रमुख निवेश स्रोतों की निरंतर भागीदारी भारत के नियामक वातावरण और विनिर्माण क्षमताओं में व्यापक अंतरराष्ट्रीय विश्वास की पुष्टि करती है। ब्राजील, न्यूजीलैंड और कनाडा जैसे उभरते निवेश स्रोत देशों की उपस्थिति देश के निवेश आधार में विविधता का संकेत देती है।
डीपीआईआईटी के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने भारत के नीतिगत माहौल पर टिप्पणी करते हुए कहा, “भारत में निवेश की गति नीतिगत स्पष्टता, संस्थागत प्रतिबद्धता और वैश्विक निवेशकों के हमारी प्रणालियों में भरोसे का प्रत्यक्ष परिणाम है। वित्त वर्ष 2025-26 में इन्वेस्ट इंडिया द्वारा निवेशित 6.1 अरब अमेरिकी डॉलर भारत के नियामक वातावरण की मजबूती और इसके आर्थिक परिवर्तन की गहराई को दर्शाते हैं। डीपीआईआईटी प्रक्रियाओं को और सरल बनाने एवं यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि निवेश रोजगार, नवाचार और दीर्घकालिक मूल्य में परिवर्तित हो।”
इन्वेस्ट इंडिया ने प्रारंभिक चरण की सलाह से लेकर निवेश के बाद की देखभाल तक निवेश चक्र के सभी चरणों में पूर्णतः सुविधा प्रदान करने को मजबूत किया है। इससे निवेश प्रस्तावों का क्रियान्वयन सुधारा है। वित्त वर्ष 2024-25 में वास्तविक निवेश में लगभग तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है जबकि औसत समझौते का आकार 1.8 गुना बढ़ गया है जो उच्च मूल्य वाले निवेशों की ओर बदलाव का संकेत देता है।
इन्वेस्ट इंडिया की प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) निवृत्ति राय ने कहा, “ये परिणाम इन्वेस्ट इंडिया की रणनीतिक निवेश भागीदार बनने की दिशा में बदलती भूमिका को दर्शाते हैं। वास्तविक निवेश में तीन गुना वृद्धि और 31,000 से अधिक नौकरियों का सृजन समन्वित नीतिगत समर्थन, संस्थागत तेजी और निवेशक विश्वास के प्रभाव को दर्शाता है। इन्वेस्ट इंडिया देश को विकसित भारत 2047 की ओर ले जाते हुए इस गति को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।”
पिछले वित्त वर्ष में इन्वेस्ट इंडिया की मदद से हुए निवेश में विनिर्माण और मूल्यवर्धन संबंधी देश की प्राथमिकताओं के अनुरूप लगभग 65 प्रतिशत निवेश रसायन, फार्मास्यूटिकल्स और जैव प्रौद्योगिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में लगा है। इलेक्ट्रॉनिक्स प्रणाली डिजाइन और विनिर्माण (ईएसडीएम), एयरोस्पेस और रक्षा तथा ऑटो/ईवी जैसे उभरते क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण गतिविधि दर्ज की गई है।
वित्त वर्ष 2025-26 में राज्यों में निवेश का भौगोलिक विविधीकरण जारी रहा। गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश उच्च मूल्य वाली परियोजनाओं के कारण प्रमुख केंद्र बनकर उभरे, जबकि राजस्थान और उत्तर प्रदेश में परियोजनाओं की बेहतरी दर्ज की गई। तमिलनाडु, कर्नाटक, हरियाणा और दिल्ली जैसे स्थापित निवेश गंतव्यों में प्रमुख निवेश प्रवाह जारी रहा। असम, बिहार और सिक्किम में परियोजनाओं की शुरुआत निवेश परिदृश्य के विस्तार का संकेत देती है। रोजगार सृजन के मामले में मध्य प्रदेश अग्रणी राज्य बनकर उभरा, जिसके बाद आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना और महाराष्ट्र का स्थान रहा।
अधिकारियों ने कहा कि ये रुझान भारत की ऐतिहासिक नीतिगत पहलों के समग्र प्रभाव को दर्शाते हैं, जिनमें मेक इन इंडिया, 14 प्रमुख क्षेत्रों में उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाएं और सतत अवसंरचना विकास कार्यक्रम शामिल हैं। इन्होंने वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और विश्वसनीय विनिर्माण गंतव्य के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत किया है।
