मैंने ऐसा लोकतंत्र कभी नहीं देखा: मतदान के बाद ममता बनर्जी ने जताई नाराजगी

कोलकाता, 29 अप्रैल (वार्ता) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को राज्य विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के दौरान केंद्रीय बलों पर “अति” करने और “मतदाताओं को डराने-धमकाने” का आरोप लगाया।

भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की उम्मीदवार ममता बनर्जी ने अपना वोट डालने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में आरोप लगाया कि सीआरपीएफ और पर्यवेक्षक लोगों की पिटाई कर रहे हैं। सुश्री बनर्जी ने कहा, “वे महिलाओं और बच्चों तक को नहीं छोड़ रहे हैं। कल से उन्होंने इतने लोगों को गिरफ्तार किया है। मैंने इस तरह का लोकतंत्र कभी नहीं देखा। यह अदालत की अवमानना है। केंद्रीय बल लोगों को इस तरह प्रताड़ित नहीं कर सकते। बूथों पर राज्य की पुलिस मौजूद नहीं है। मैं 1984 से चुनाव लड़ रही हूँ, लेकिन मैंने ऐसी प्रताड़ना कभी नहीं देखी।”

मतदान के दिन अपनी सामान्य दिनचर्या से इतर, ममता बनर्जी सुबह ही घर से बाहर निकल गईं और घोषणा की कि वे पूरा दिन सड़कों पर रहकर चुनाव प्रक्रिया की निगरानी करेंगी और वह ऐसा एक मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि भवानीपुर से तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार के रूप में करेंगी।

सुश्री बनर्जी ने निवर्तमान मंत्री और कोलकाता पोर्ट से पार्टी उम्मीदवार फिरहाद हकीम के आवास पर केंद्रीय बलों और पुलिस पर्यवेक्षक के देर रात पहुँचने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए निर्वाचन आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए और इसे डराने की कोशिश करार दिया। उन्होंने कहा, “बॉबी (फिरहाद हकीम) की पत्नी घर पर थीं और वे आधी रात को दरवाजा खटखटा रहे थे। महिलाएं दहशत में थीं।”

मतदान के दूसरे चरण में सभी की निगाहें भवानीपुर पर टिकी हैं, जहाँ सुश्री बनर्जी का मुकाबला भाजपा प्रत्याशी सुवेंदु अधिकारी से है। कालीघाट स्थित अपने आवास से निकलने के बाद सुश्री बनर्जी ने पहले चेतला क्षेत्र का दौरा किया और फिर पद्मपुकुर रोड की ओर बढ़ गईं। वे कई बूथों पर रुकीं और एक बूथ का बारीकी से निरीक्षण करने के लिए अपनी कार से नीचे भी उतरीं। चेतला के दौरे के दौरान उन्होंने हकीम से मुलाकात की और मीडिया से कहा कि वे दिन भर अपने निर्वाचन क्षेत्र में रहकर एक के बाद एक बूथों का दौरा करती रहेंगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के बाहर से आए पर्यवेक्षक भाजपा के निर्देशों पर काम कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ऐसी परिस्थितियों में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित किए जा सकते हैं। तृणमूल प्रमुख ने यह भी दावा किया कि उनकी पार्टी के झंडे हटाए जा रहे हैं और उनके क्षेत्र में “बाहरी लोग” गड़बड़ी पैदा कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वार्ड 70 के एक पार्षद को बाहर निकलने से रोका गया और पार्टी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। उन्होंने कहा, “मैं और अभिषेक (बनर्जी) पूरी रात जागे हुए थे।”

आमतौर पर सुश्री बनर्जी मतदान के शुरुआती घंटों में घर पर रहकर ही गतिविधियों पर नजर रखती हैं और बाद में वोट डालने निकलती हैं, लेकिन इस बार उन्होंने परंपरा तोड़ते हुए पूरे दिन जमीन पर रहकर सक्रिय रूप से चुनाव प्रक्रिया की निगरानी करने का फैसला किया।

 

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