महिला व बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी को रिश्वत लेने के मामले में 4 वर्ष की सजा

दमोह। न्यायालय विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम दमोह संतोष कुमार गुप्‍ता की अदालत ने आरोपी श्रीमती श्‍वेता सिंह ठाकुर को दोष सिद्ध पाते हुए भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन -2018 ) की धारा 13(1)बी सहपठित धारा 13(2) भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम में 04 वर्ष का सश्रम कारावास व 2000 रूपये अर्थदण्‍ड से दण्डित किया गया. अभियोजन की ओर से पैरवी प्रभारी उपनिदेशक अभियोजन धर्मेन्‍द्र सिंह तारन के निर्देशन में सहायक जिला अभियोजन अधिकारी संजय कुमार रावत द्वारा की गई व विनय नामदेव द्वारा आवश्‍यक सहयोग किया गया.अभियोजन के अनुसार 22 दिसम्बर 2019 को आवेदिका भानुकुमारी पति कमलेश गौंड निवासी ग्राम घुटरिया, तहसील तेंदूखेड़ा, दमोह द्वारा आरोपिया श्रीमती श्वेता ठाकुर, प्रभारी परियोजना अधिकारी, महिला व बाल विकास परियोजना तेंदूखेड़ा, जिला दमोह के विरुद्ध पुलिस अधीक्षक, लोकायुक्त कार्यालय सागर के समक्ष रिश्वत मांगने संबंधी शिकायत प्रस्तुत की गई. शिकायत में उल्लेख किया गया था कि आवेदिका को जारी नोटिस पर कार्यवाही न करने के एवज में आरोपिया द्वारा 6000 रूपये की रिश्वत की मांग की जा रही थी.आवेदिका उक्त राशि देना नहीं चाहती थी तथा आरोपी को रंगे हाथों पकड़वाना चाहती थी.

शिकायत के सत्यापन हेतु आवेदिका को डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर प्रदान किया गया.दिनांक 23 दिसंबर 2019 को आवेदिका द्वारा आरोपिया से उसके किराए के मकान, तेंदूखेड़ा में की गई बातचीत रिकॉर्ड की गई, जिसमें 4000 रूपये रिश्वत की मांग स्पष्ट रूप से पाई गई. उक्त वार्ता के दौरान अनावेदिका के पति अनूप जैन (लोक सेवक नहीं) की उपस्थिति में उसके द्वारा भी रिश्वत मांगना पाया गया.रिकॉर्डेड वार्ता की तस्दीक उपरांत पंचनामा तैयार कर सीडी बनाई गई. दिनांक 26 दिसंबर 2019 को ट्रैप कार्यवाही के दौरान आवेदिका द्वारा 4000 रूपये की रिश्वत राशि आरोपिया को दी गई, जिसे आरोपिया ने स्वीकार कर अपनी उूनी बनियान की जेब में रख लिया.पूर्व निर्धारित संकेत मिलने पर ट्रैप दल द्वारा आरोपीगण को रंगे हाथों पकड़ लिया गया. सोडियम कार्बोनेट परीक्षण में आरोपी के हाथ, बनियान व संबंधित पंचसाक्षियों के हाथों के घोल का रंग गुलाबी पाया गया, जिससे रिश्वत ग्रहण की पुष्टि हुई.

विवेचना में संकलित भौतिक, मौखिक व इलेक्ट्रानिक अभिलेखीय साक्ष्य के आधार पर आरोपीगण के विरूद्ध अभियोग पत्र न्यायालय पेश किया गया.मामले में दस्तावेजी साक्ष्य, मौखिक साक्ष्य व अभियोजन द्वारा प्रस्तुत तर्को से सहमत होकर न्यायालय द्वारा 29 अप्रैल 2026 को पारित निर्णय में आरोपिया श्‍वेता सिंह ठाकुर 04 वर्ष का सश्रम कारावास से दण्डित किया गया.

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