नई दिल्ली। REC Limited ने 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए 16,282 करोड़ का अब तक का सबसे अधिक वार्षिक शुद्ध लाभ दर्ज किया है और 18.55 प्रति शेयर का रिकॉर्ड कुल लाभांश घोषित किया है। कंपनी ने बताया कि भारत का बिजली क्षेत्र केंद्र सरकार की पहलों के चलते नए उभार के दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां पहले घाटे में रहने वाली बिजली वितरण कंपनियों ने सामूहिक रूप से शुद्ध लाभ अर्जित कर बड़ा बदलाव दिखाया है।
कंपनी के अनुसार, बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता और स्थिर माहौल के कारण जोखिम प्रीमियम में कमी आई है, जिसका लाभ उधारकर्ताओं को ऋण दरों में संतुलन के जरिए दिया गया है। सतत विकास पर फोकस के चलते एनपीए (स्टेज-3) लगभग शून्य (0.12%) पर पहुंच गया है, जबकि स्टेज-2 ऋण में सालाना आधार पर 75% की कमी आई है। पिछले वर्ष में लगभग 17,000 करोड़ की वृद्धि के साथ कंपनी का कुल लोन बुक 5.84 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जबकि नवीकरणीय ऊर्जा पोर्टफोलियो 30% बढ़कर 75,347 करोड़ हो गया है।
वित्तीय प्रदर्शन में स्वीकृत ऋण 21% बढ़कर 4,09,097 करोड़, वितरण 10% बढ़कर 2,11,189 करोड़ और आरबीपीएफ को छोड़कर वितरण 28% बढ़ा। नेटवर्थ 9% बढ़कर 84,290 करोड़ हो गई, जबकि पूंजी पर्याप्तता अनुपात 23.11% रहा, जो भविष्य की वृद्धि के लिए मजबूत स्थिति दर्शाता है। कंपनी का इंटरेस्ट स्प्रेड 2.62% और नेट इंटरेस्ट मार्जिन 3.43% रहा, वहीं प्रति शेयर आय 61.71 तक पहुंच गई।
शेयरधारकों को लाभ देने की परंपरा जारी रखते हुए बोर्ड ने 1.55 प्रति शेयर का अंतिम लाभांश घोषित किया, जिससे वित्त वर्ष 2025-26 का कुल लाभांश 18.55 प्रति शेयर हो गया। कंपनी को लगातार तीन वर्षों तक ‘एक्सीलेंट’ MoU रेटिंग मिली है और लाभ कमाने वाले सीपीएसई में इसकी रैंकिंग 9वें से बढ़कर 5वें स्थान पर पहुंच गई है। जनवरी 2026 में कंपनी का ‘महारत्न’ दर्जा भी बरकरार रखा गया है।
सस्टेनेबिलिटी पर जोर देते हुए REC ने कहा कि ESG सिद्धांत उसके संचालन का अहम हिस्सा हैं, खासकर नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में विस्तार के साथ, जिसके चलते उसे NSE ESG रेटिंग में देश की शीर्ष रेटिंग प्राप्त हुई है।
