
सौसर। सौसर का सिविल अस्पताल इन दिनों इलाज के लिए नहीं, बल्कि आपसी गुटबाजी और विवादों के कारण चर्चा में है। बीएमओ डॉ. योगेश शुक्ला और अस्पताल के अन्य डॉक्टरों व कर्मचारियों के बीच चल रहा विवाद अब चरम पर पहुंच गया है। बीएमओ को हटाने की मांग को लेकर अड़े समस्त स्टाफ ने बुधवार से ‘काम बंद हड़ताल’ का आव्हान किया है। जिससे क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाने की संभावना है।
हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाओं पर लगेगा ताला
बीएमओ के खिलाफ लामबंद हुए डॉक्टरों और कर्मचारियों का कहना है कि जब तक डॉ. योगेश शुक्ला को पद से नहीं हटाया जाता, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे। हालांकि बीएमओ बुधवार से छुट्टी पर हैं, लेकिन उनके विरोध की आग शांत होने का नाम नहीं ले रही है। इस हड़ताल का व्यापक असर न केवल सिविल अस्पताल, बल्कि क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले प्राथमिक और उप-स्वास्थ्य केंद्रों पर भी पड़ना तय है।
आपसी विवाद के कारण इलाज से वंचित हो रहे है गरीब मरीज
अस्पताल के इस अंदरूनी कलह का खामियाजा उन गरीब मरीजों को भुगतना पड़ रहा है, जो दूर-दराज के गांवों से इलाज की आस में सरकारी अस्पताल पहुंचते हैं। हड़ताल के कारण ओपीडी से लेकर अन्य जरूरी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, जिससे मरीजों को निजी क्लीनिकों की ओर रुख करना पड़ रहा है या बिना इलाज के वापस लौटना पड़ रहा है।
अधिकारियों की चुप्पी पर उठे सवाल
हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग की यह आपसी लड़ाई अब जिले के आला अधिकारियों के संज्ञान में भी है। इसके बावजूद, अब तक प्रशासन की ओर से मामले को सुलझाने या वैकल्पिक व्यवस्था बनाने के लिए अब तक दखल नहीं दी गई है। अधिकारियों की इस बेरुखी ने अस्पताल के माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है।
