इंदौर:शहर में यातायात जाम होना अब आम हो गया गया है. प्रशासन एवं पुलिस के यातायात सुधार और व्यवस्था के सारे दावे खोखले साबित हो रहे है. हाईकोर्ट की फटकार का भी असर नहीं हो रहा है. स्थिति जस की तस बनी हुई है और कोई देखने वाला नहीं है. सारा ध्यान बस यातायात पुलिस का बिना हेलमेट पर चालान काटने पर है.शहर के प्रमुख मार्गो की बात करे तो सबसे पहले अब रोड का ही दृश्य सामने आता है.
उक्त सड़क से बीआरटीएस हटाने के बाद भी यातायात जाम की यथास्थिति बरकरार है. उक्त सड़क पर जाम का दृश्य देखकर ऐसा लगता है, मानो किसी फिल्म का स्थाई पोस्टर बना हुआ है. खासकर सुबह 10 से रात 9 बजे तक. इसका कारण यह है कि शहर में हाईकोर्ट ने बीआरटीएस सड़क तो हटवा दी, लेकिन एलिवेटेड कॉरिडोर निर्माण के लिए पूरे एबी रोड पर बीआरटीएस मिडिल लेन जितनी ही जगह रोककर चद्दरें ठोक दी गई है. अभी हालत यातायात के हालत बीआरटीएस से भी ज्यादा खराब हो गए है. ध्यान देने वाली बात यह है कि पूरे एबी रोड पर घर आधा किलोमीटर पर जाम हो जाता है. शहर की जनता मौन रह कर उस प्रदूषण भारी आबोहवा में से रोज गुजरने को मजबूर है. कोई सुनने वाला नहीं है.
प्रयोगशाला बनाकर रख दिया
दरअसल इंदौर को अधिकारियों ने हर कार्य की प्रयोगशाला बना कर रख रखा है. खास बात यह है कि हर स्थिति का सामना शहर की जनता बढ़ी शालीनता से करती है और करती आ रही है. हालत सुधारने की बजाय प्रशासन और पुलिस सिर्फ प्रयोग करते नजर आते है. ऐसा नहीं तो वैसा कर लो, मगर यातायात व्यवस्था को सुधारने की कोई स्थाई योजना नहीं है. इसका उदाहरण है एबी रोड, जहां पर बीआरटीएस हटाया तो एलिवेटेड कॉरिडोर थोप दिया. अब फिर शहर की जनता को अगले पांच सालों से ज्यादा समय तक रेंगने की प्रेक्टिस बना कर रखना होगी.
सड़क सुरक्षा नहीं बल्कि शहर जाम रखो समिति
यातायात व्यवस्था और सुधार के लिए बनी सड़क सुरक्षा समिति भी सिर्फ बैठक और प्रयोग करने की समिति बनकर रह गई है. समिति की बैठक में आज सर्विस रोड के गड्ढे भर दिए और ड्रेनेज लाइन, कल नर्मदा लाइन के हटाने की खुदाई में सड़क जाम लगने के तर्क आते हैं. पहले भी शहर में अन्य विकास कार्य होते थे, लेकिन आ जनता इतनी परेशान नहीं होती थी. अब परेशानी और समस्या का कारण सिर्फ विभिन्न तरह के प्रयोग है, जो रोज हो रहे है. प्रयोग बाजी में शहर में यातायात केके स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है.
बेसिक इंफ्रास्ट्रक्टर पर नहीं कर रहे काम
एक्सपर्ट प्रफुल्ल जोशी ने बताया कि शहर में यातायात की विकट स्थिति पर कोई संशय नहीं है. यातायात को लेकर बेसिक इंफ्रास्ट्रख्र पर काम नहीं किया जा रहा है. यातायात के लिए जरुरी है फ्लाई ओवर ब्रिज, अंडर पास और ट्रैफिक सिग्नल. फ्लाई ओवर बने है, लेकिन अंडर पास कहां है? ट्रैफिक सिग्नल 15 से 20 सेकंड से ज्यादा नहीं होना चाहिए. इंदौर में प्रमुख चौराहों पर 3 से 3.30 मिनट तक सिग्नल है. तीसरा सबसे महत्वपूर्ण बात यातायात के लिए यह है कि किसी भी शहर में 3.5 से ज्यादा क्यूएस (मलिटी पर साइकिल) नहीं होना चाहिए. हमारे इंदौर में क्यूएस 8 है, यानि एक सिग्नल पर 8 सौ वाहन जमा हो जाते है, जो सामान्य 3 से साढ़े 3 सौ से ज्यादा नहीं होना चाहिए. यही ट्रैफिक का नियम है, जिसका पालन शहर में नहीं किया जा रहा है और हालत बेकाबू होकर बिगड़ते ही जा रहे हैं
