
भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर दिनभर चली चर्चा के बाद महिलाओं को संसद और सभी विधानसभाओं में एक तिहाई आरक्षण तथा परिसीमन प्रक्रिया को तत्काल लागू करने संबंधी संकल्प पारित किया गया। सत्र के समापन पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने हमेशा स्वार्थ, दलगत राजनीति और तुष्टिकरण को प्राथमिकता दी है तथा इतिहास गवाह है कि कांग्रेस ने हर दौर में महिला आरक्षण की राह में बाधाएं खड़ी की हैं। उन्होंने कहा कि 1972, 1974 में परिसीमन रोकने से लेकर 42वें संविधान संशोधन तक सीट वृद्धि को रोका गया और हाल ही में भी 33 प्रतिशत आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष ने नकारात्मक रुख अपनाया। मुख्यमंत्री ने इसे “नारी शक्ति के स्वाभिमान पर प्रहार” बताते हुए कहा कि कांग्रेस ने महिलाओं के अधिकारों के साथ विश्वासघात किया है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में केंद्र और राज्य सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले वर्षों में महिलाओं को पंचायत से संसद तक प्रतिनिधित्व देने के ठोस प्रयास हुए हैं। उन्होंने बताया कि लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने की पहल भी महिलाओं को 33 प्रतिशत हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई थी। साथ ही कांग्रेस पर पिछड़ा वर्ग विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा ने ओबीसी समुदाय और महिलाओं को नेतृत्व में आगे बढ़ाया है, जबकि कांग्रेस ने आयोगों की रिपोर्ट तक लागू नहीं की।
महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश को मॉडल राज्य बताते हुए कहा कि प्रदेश में 5 लाख से अधिक स्व-सहायता समूहों से जुड़कर 65 लाख महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं। लाड़ली बहना योजना के तहत 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह आर्थिक सहायता दी जा रही है। स्टार्टअप, एमएसएमई, विद्युत, पुलिस और औद्योगिक क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 32 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं, मातृ मृत्यु दर में कमी आई है और महिलाओं की सुरक्षा के लिए वन स्टॉप सेंटर सहित कई सुविधाएं बढ़ाई गई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी नौकरियों और चयन प्रक्रियाओं में भी महिलाओं की भागीदारी लगभग 40 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो यह दर्शाता है कि आरक्षण के अवसर को महिलाओं ने सशक्त भागीदारी में बदला है। उन्होंने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में लिए गए निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि नगरीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण, लोकसभा और विधानसभा में बढ़ती महिला भागीदारी तथा प्रशासनिक स्तर पर महिलाओं की मजबूत उपस्थिति, प्रदेश में सशक्त नारी नेतृत्व की तस्वीर पेश करती है।
