
मनासा। मध्यप्रदेश का नीमच जिला इन दिनों देश की विभिन्न पुलिस इकाइयों की रडार पर है। वजह है नीमच जिले का मनासा कस्बा, जो बीते कुछ वर्षों से अंतरराज्यीय चोरों के लिए चोरी के सोने-चांदी के आभूषण खपाने का ‘सुरक्षित ठिकाना’ (हब) बन गया है। शनिवार को राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, तमिलनाडु और कर्नाटक राज्यों की पुलिस टीमों की मनासा में हुई आमद ने हडक़ंप मचा दिया है।
पांच राज्यों की पुलिस का डेरा, कई व्यापारी हिरासत में:-
चोरी की बड़ी वारदातों को अंजाम देने वाले गिरोहों ने पूछताछ में एक ही नाम उगला—’मनासा के व्यापारी’। शनिवार को जब हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु की पुलिस ने स्थानीय थानों की मदद से मनासा और कुकड़ेश्वर में दबिश दी, तो कई व्यापारियों के होश उड़ गए।
राजस्थान पुलिस:-
जैसलमेर में पकड़े गए चोर गिरोह ने पुलिस को बताया कि उन्होंने 40 तोला सोना और 6 किलो चांदी के आभूषण मनासा के व्यापारियों को बेचे थे। इस इनपुट पर राजस्थान पुलिस ने स्थानीय दुकानदारों के ठिकानों पर छापेमारी की।
हरियाणा पुलिस: –
कुकड़ेश्वर और मनासा के व्यापारियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए हरियाणा पुलिस ने पहले कई संदिग्धों को हिरासत में लिया और शनिवार को कुछ व्यापारियों को गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई।
गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु: –
इन राज्यों में हुई बड़ी चोरी और लूट की घटनाओं के तार भी मनासा से जुड़े मिले हैं। पुलिस की टीमें यहां के व्यापारियों के रिकॉर्ड खंगाल रही हैं।
फर्जी बैंक खाते और हवाला का बड़ा खेल:-
पुलिस की शुरुआती जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। चोरी का माल खरीदने के लिए व्यापारी सीधे कैश के साथ-साथ ‘हवाला’ का सहारा ले रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, कई व्यापारियों ने लेनदेन को वैध दिखाने के लिए बैंकों में फर्जी खाते खुलवा रखे थे। इन्हीं खातों के जरिए लाखों का अवैध लेनदेन हो रहा था, जिससे पुलिस को अंधेरे में रखा जा सके।
मनासा में पसरा सन्नाटा:-
एक साथ पांच राज्यों की पुलिस की सक्रियता ने मनासा के व्यापारिक गलियारों में खौफ पैदा कर दिया है। जिन व्यापारियों ने कम कीमत के लालच में चोरी का माल खरीदा था, उनमें से कई अब दुकानों पर ताले जडक़र भूमिगत हो गए हैं। सूत्रों का कहना है कि यह तो अभी शुरुआत है; जैसे-जैसे पूछताछ आगे बढ़ेगी, कई सफेदपोशों और बड़े व्यापारियों के चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।
पुलिस की सख्ती जारी:
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जांच का दायरा अब उन संदिग्धों तक बढ़ाया जा रहा है जो इस पूरे सिंडिकेट को संरक्षण दे रहे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन भी अलर्ट मोड पर है।
