भोपाल: राज्य विधानसभा के विशेष सत्र में ‘नारी शक्ति वंदन संकल्प’ को लेकर चर्चा शुरू होते ही राजनीतिक माहौल गरमा गया। सत्ता पक्ष जहां इस संकल्प को महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बता रहा है, वहीं विपक्ष ने शुरुआत से ही प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए विरोध का रुख अपनाया।सत्र के दौरान जैसे ही विधानसभा अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को संकल्प प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्वाइंट ऑफ ऑर्डर उठाने की मांग कर दी।
इस पर अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि पहले संकल्प पेश होने दिया जाए, उसके बाद विपक्ष को पूरा अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री ने भी इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि बिना किसी प्रस्तुति के आपत्ति उठाना उचित नहीं है।इसके बाद मुख्यमंत्री ने संकल्प पत्र पेश करते हुए देश की संसद और सभी विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने तथा परिसीमन की प्रक्रिया पूरी कर इसे तत्काल लागू करने की मांग रखी। उन्होंने इस मुद्दे पर खुली और सार्थक बहस की जरूरत पर जोर दिया।
हालांकि, चर्चा के दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने विपक्ष पर महिलाओं के मुद्दे पर बाधा डालने का आरोप लगाया, जबकि कांग्रेस सदस्यों ने इसका विरोध करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।सत्र से पहले भी राजनीतिक हलचल तेज रही। मुख्यमंत्री ने भाजपा विधायक दल की बैठक में इस संकल्प को ऐतिहासिक बताया, वहीं कांग्रेस ने इसे लेकर अपनी अलग रणनीति बनाई।
इसी बीच कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह ट्रैक्टर-ट्रॉली से विधानसभा पहुंचने की कोशिश करते नजर आए, जिन्हें पुलिस ने मंत्रालय के पास रोक दिया। इस दौरान पुलिस और विधायक के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की भी हुई। बाद में विधायक गेंहू का गठ्ठा लेकर विधानसभा पहुंचे, जो पूरे घटनाक्रम का प्रतीकात्मक विरोध बन गया।महिला आरक्षण के मुद्दे पर प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक सियासत तेज है और इस संकल्प के बहाने सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। आने वाले समय में इस विषय पर राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
