गर्ल्स कॉलेज: पहले मर्ज करने की घोषणा, फिर परीक्षा केंद्र खत्म, अब वित्तीय अधिकार भी छीने

शाजापुर:सरकार ने बेटियों को उच्च शिक्षा देने के लिए 1987 में किला परिसर में शासकीय कन्या महाविद्यालय की स्थापना की. सिर्फ कला संकाय के साथ शुरू हुआ यह कॉलेज शुरुआत से ही अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष करता आ रहा है. अब स्थिति यह है कि यह कॉलेज बंद या बीकेएसएन कॉलेज में मर्ज होने की कगार पर खड़ा है. जिम्मेदारों ने गत वर्ष इसकी औपचारिक घोषणा भी कर दी थी. हाल ही में सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन ने कन्या महाविद्यालय को अपने परीक्षा केंद्रों की सूची से भी बाहर कर दिया है और अब अतिरिक्त संचालक उज्जैन के एक पत्र के बाद इस कॉलेज के वित्तीय अधिकार का प्रभार भी बीकेएसएन कॉलेज शाजापुर को दे दिया गया है. ऐसे में लगातार छिन रही सुविधाओं के बीच कॉलेज का अस्तित्व संकट में आ गया है.
बता दें शासन ने 1987 में 1 प्राचार्य, 6 सहायक प्राध्यापक, 1 ग्रंथपाल, 1 क्रीड़ा अधिकारी, 1 मुख्य लिपिक, 1 लेखापाल, 1 सहायक ग्रेड दो, 2 सहायक ग्रेड तीन, 1 प्रयोगशाला तकनीशियन, 1 प्रयोगशाला परिचारक, 1 बुक लिफ्टर, 2 भृत्य, 1 स्वीपर और 1 चौकीदार के पद स्वीकृत करते हुए शासकीय कन्या महाविद्यालय शुरू किया था. शुरुआत में छात्राओं की संख्या सम्मानजनक रही. कॉलेज प्रबंधन ने छात्राओं की मांग पर यहां स्ववित्त से एमकॉम और बीकॉम प्लेन व बीकॉम कम्प्यूटर एप्लीकेशन के कोर्स भी शुरू किए, लेकिन इनकी फीस अधिक होने के कारण चंद सालों में ही ये कोर्स बंद करना पड़े. जिसके चलते महाविद्यालय में सिर्फ कला संकाय ही बचा. जिसमें भी अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, गृह विज्ञान, अंग्रेजी साहित्य, हिंदी साहित्य विषय ही संचालित होते रहे. कॉलेज प्रबंधन ने कई बार यहां कला संकाय में इतिहास और उर्दू विषय खोलने की मांग की. शासन स्तर पर वाणिज्य और विज्ञान संकाय शुरू करने के लिए भी पत्राचार किए, लेकिन जिम्मेदारों ने इस मांग को आज तक पूरा नहीं किया. जिसके चलते यहां छात्राओं की संख्या लगातार घटती चली गई.
तीन स्थायी, बाकी अतिथि विद्वान
कॉलेज में यूं तो सहायक प्राध्यापक के 6 पद स्वीकृत हैं, लेकिन अर्थशास्त्र विषय में ही स्थायी प्रोफेसर डॉ. पी. मंूदड़ा कार्यरत हैं, जो मई माह में सेवानिवृत्त होने वाले हैं. इनके अतिरिक्त हाल ही में अंग्रेजी और गृह विज्ञान विषय में दो सहायक प्राध्यापक नियुक्त हुए हैं. जो परीवीक्षा अवधि में हैं. राजनीति विज्ञान, समाज शास्त्र और हिंदी साहित्य में अतिथि विद्वान कार्यरत हैं. क्रीड़ा अधिकारी का पद भी वर्तमान में खाली पड़ा है. जिससे महाविद्यालय में खेल गतिविधियां भी संचालित नहीं हो पाती हैं.

ग्रंथालय में 4 साल से जड़ा है ताला

महाविद्यालय में स्थायी ग्रंथपाल के रूप में सुश्री चंचल ज्ञानचंदानी की पदस्थापना की गई थी, लेकिन वे अप्रैल 2022 से लगातार बिना सूचना के अनुपस्थित हैं. जिसके कारण गं्रथालय पर 4 साल से ताला जड़ा हुआ है. जिम्मेदार हर माह इनकी अनुपस्थिति की सूचना भी वरिष्ठ कार्यालय को दे रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारों ने अब तक न तो इनकी उपस्थिति को लेकर कोई प्रयास किए, न ही महाविद्यालय में अन्य ग्रंथपाल की व्यवस्था की, जिससे ग्रंथालय संबंधी गतिविधियां रूकी हुई हैं.

गत वर्ष फस्र्ट ईयर में सिर्फ 17 एडमिशन...

गत वर्ष 2025-26 में हुए बीए फस्र्ट ईयर की बात करें, तो सिर्फ 17 ही एडमिशन हुए थे, जिसके कारण स्थिति और बद्तर हो गई. वर्तमान में बीए की तीनों कक्षाओं को मिलाकर यहां छात्राओं की कुल संख्या 76 है, जो कि चिंता का विषय है. कॉलेज प्रबंधन ने यहां शासन स्तर से वाणिज्य और विज्ञान संकाय शुरू करने के लिए भी अनेक बार पत्राचार किए, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकले, जिसके कारण महाविद्यालय में प्रवेश की संख्या लगातार घटती चली गई.

ऑफिस स्टाफ भी पर्याप्त नहीं…

ऑफिस स्टाफ की बात करें, तो यहां लंबे समय से मुख्य लिपिक और लेखापाल के पद खाली हैं. सहायक ग्रेड – 2 के पद पर कार्यरत जेपी माथुर जुलाई 2026 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं. इसके बाद यह पद भी खाली हो जाएगा. वहीं सहायक ग्रेड – 3 के दो में से एक पद खाली है. भृत्य के दो में से एक पद रिक्त है. बुक लिफ्टर, चौकीदार, स्वीपर और प्रयोगशाला परिचारक के पद भी लंबे समय से खाली पड़े हैं. शासन द्वारा इन पदों पर कोई नई नियुक्ति भी नहीं की जा रही, जिससे कॉलेज प्रबंधन की समस्या बढ़ गई है

अब कॉलेज से वित्तीय अधिकार भी छीन लिए

पिछले दिनों सम्राट विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन द्वारा क्षेत्रांतर्गत आने वाले परीक्षा केंद्रों की सूची जारी की गई थी, जिसमें शासकीय कन्या महाविद्यालय का नाम शामिल नहीं था. ऐसे में इस महाविद्यालय की छात्राओं को बीकेएसएन कॉलेज शाजापुर में जाकर परीक्षा देना पड़ रही है. वहीं हाल ही में गल्र्स कॉलेज के आहरण संवितरण अधिकार भी छीन लिए गए. ये अधिकार अब बीकेएसएन कॉलेज शाजापुर के प्राचार्य को दिए गए हैं. उन्हीं के हस्ताक्षर से अब गल्र्स कॉलेज के वित्तीय कार्य सम्पादित हो रहे हैं.

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