18 माह में बनकर तैयार होंगे दोनों एलिवेटेड ब्रिज

उज्जैन: सिंहस्थ-2028 के मद्देनजर तैयार की गई एलिवेटेड ब्रिज परियोजना के टेंडर खुल गए हैं और चार कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा में रवि इंफ्रा सबसे कम बोली लगाकर आगे निकल आई है. विभागीय प्रक्रिया के अनुसार अब तकनीकी और वित्तीय परीक्षण के बाद कार्य आदेश जारी होने की स्थिति बनेगी. दोनों ब्रिज को बनाने की अवधि 18 माह तय की गई है.

करीब 416 करोड़ रुपए की इस महत्वाकांक्षी योजना को रवि इंफ्रा ने लगभग 300 करोड़ रुपए में पूरा करने की पेशकश की है. कम दर पर काम करने की तैयारी के कारण कंपनी को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है. उल्लेखनीय है कि यही एजेंसी उज्जैन-इंदौर सिक्स लेन और हरिफाटक ब्रिज जैसे प्रमुख निर्माण कार्य पहले से कर रही है, जिससे इसके अनुभव को भी अहम माना जा रहा है. टेंडर के दस्तावेज जांचे जाने के बाद कंपनी को वर्क आर्डर जारी किया जएगा.

उज्जैन विकास की नई इबारत
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने जब एलिवेटेड ब्रिज की घोषणा की थी तो किसी ने सोचा नहीं था कि इतनी जल्दी योजना को अमलीजामा पहनाया जाएगा, अब यह दोनों ऐलिवेटेड ब्रिज उज्जैन शहर की नई इबारत लिखेंगे. सिंहस्थ के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए यह परियोजना केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी ट्रैफिक व्यवस्था को नए सिरे से व्यवस्थित करने की दिशा में बड़ा प्रयास है. प्रशासन का उद्देश्य है कि मुख्य मार्गों पर वाहनों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित हो, ताकि श्रद्धालुओं को जाम और लंबी प्रतीक्षा से राहत मिल सके.

पहला एलिवेटेड ब्रिज
योजना के तहत शहर के सबसे व्यस्त क्षेत्रों को जोड़ने के लिए दो अलग-अलग एलिवेटेड ब्रिज बनाए जाएंगे. पहला कॉरिडोर मकोड़ियाआम से हरिफाटक (फोरलेन) करीब 3.5 किलोमीटर लंबा यह मार्ग इंदिरानगर क्षेत्र से शुरू होकर इंदौर गेट होते हुए हरिफाटक तक पहुंचेगा. यह फोरलेन कॉरिडोर होगा और इसके नीचे सर्विस रोड विकसित की जाएगी, जिससे स्थानीय यातायात और व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित न हो.

दूसरा ऐलिवेटेड ब्रिज
इंदौर गेट से निकास चौराहे तक लगभग 1.732 किलोमीटर लंबा यह ब्रिज पुराने शहर के घने बाजारों,नई सड़क, फव्वारा चौक और दौलतगंज—के ऊपर से निकलेगा. इससे इन क्षेत्रों में रोजाना लगने वाले जाम से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.

18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य
प्रशासन ने निर्माण एजेंसी के लिए समयसीमा भी तय कर दी है. काम शुरू होने के बाद 18 महीनों में दोनों कॉरिडोर तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि सिंहस्थ-2028 से पहले यह पूरी तरह चालू हो सके.

15 से ज्यादा चौराहों पर मिलेगी राहत
वर्तमान में इंदिरानगर से हरिफाटक या पुराने शहर की ओर जाने वाले वाहन चालकों को कई प्रमुख और भीड़भाड़ वाले चौराहों, इंदौरगेट, देवासगेट, चामुंडा, चरक अस्पताल, कोयलाफाटक, गाड़ी अड्डा, चिमनगंज मंडी सहित अन्य मार्गों- से होकर गुजरना पड़ता है. एलिवेटेड ब्रिज बनने के बाद यह यात्रा बिना रुकावट और कम समय में पूरी हो सकेगी. इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि ईंधन खपत और प्रदूषण में भी कमी आएगी.

पुराना शहर होगा जाम मुक्त
निकास से हरिफाटक तक जाने वाले मार्ग पर तेलीवाड़ा, कंठाल, नई सड़क और दौलतगंज जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में रोजाना जाम की स्थिति बनती है. एलिवेटेड कॉरिडोर इन इलाकों के ऊपर से गुजरने के कारण स्थानीय बाजारों पर दबाव कम करेगा और यातायात दो स्तरों पर विभाजित हो जाएगा- ऊपर तेज रफ्तार, नीचे स्थानीय आवागमन.

विकास और सुविधा का नया मॉडल
यह परियोजना केवल ट्रैफिक सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर के समग्र विकास की दिशा में भी बड़ा कदम मानी जा रही है. इससे उज्जैन को एक आधुनिक शहर की पहचान मिलेगी और धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिलेगी. श्रद्धालुओं को रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और महाकाल मंदिर तक पहुंचने में पहले की तुलना में काफी आसानी होगी.

प्रशासन के सामने चुनौती
जहां एक ओर यह परियोजना शहर के लिए बड़ी राहत लेकर आएगी, वहीं निर्माण के दौरान यातायात प्रबंधन बड़ी चुनौती रहेगा. इसके लिए प्रशासन को प्रभावी ट्रैफिक डायवर्जन प्लान लागू करना होगा, ताकि आमजन और व्यापारियों को कम से कम परेशानी हो.

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