आधार ऑपरेटर चयन में घोटाले के आरोप, रिश्वतखोरी और फर्जी प्रमाण पत्रों का खेल

सतना: महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत आधार मशीन संचालन के लिए ऑपरेटरों के चयन में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं. आरोप है कि चयन प्रक्रिया में नियमों को दरकिनार कर अनुभवहीन लोगों को फर्जी अनुभव प्रमाणपत्रों के आधार पर चयनित किया गया, जबकि योग्य और अनुभवी आवेदकों को जानबूझकर बाहर कर दिया गया.बताया जा रहा है कि चयनित उम्मीदवारों ने 1 लाख से 4 लाख रुपये तक की रिश्वत दी है.

इस वर्ष जिले में 74 आवेदनों में से 15 लोगों की सूची जारी की गई, जिसमें सीता चौरसिया का नाम सबसे विवादित रहा.आरोप है कि उनके पास आवश्यक योग्यता और अनुभव नहीं होने के बावजूद उन्हें नागौद में केंद्र आवंटित किया गया. इसी तरह, कुछ व्यक्तियों को एक साथ पांच-पांच केंद्र दे दिए गए, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है.

यूआईडीएआई के नियमों के अनुसार, ऑपरेटर के पास कक्षा 12वीं पास, एनएसईआईटी परीक्षा उत्तीर्ण और अनुभव होना चाहिए, पर इन नियमों की अनदेखी कर नियुक्तियां की गईं.शिकायतकर्ताओं ने जिला कलेक्टर और डीपीओ से निष्पक्ष जांच की मांग की है और आरोपों की गहन जांच की गुहार लगाई है.यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले दमोह में भी आधार संचालन में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे. सतना का मामला भी उसी तरह की गंभीर गड़बड़ियों की ओर संकेत कर रहा है

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