सिंगरौली:म.प्र. विधानसभा के बजट सत्र में 27 फरवरी को सिंगरौली जिले की पहचान, पर्यटन संभावनाओं और सांस्कृतिक विरासत को लेकर जोरदार आवाज उठी। सिंगरौली विधायक रामनिवास शाह ने सदन में मांग संख्या 26, 37 और 51 पर चर्चा करते हुए जिले के समग्र विकास का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया।विधायक ने अपने संबोधन में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी की सराहना करते हुए कहा कि प्रस्तुत बजट में विकास की व्यापक संभावनाएं हैं, लेकिन सिंगरौली जैसे सीमावर्ती और महत्वपूर्ण जिले के लिए विशेष योजनाएं जरूरी हैं।
उन्होंने बताया कि सिंगरौली केवल ऊर्जा नगरी ही नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी समृद्ध क्षेत्र है। उत्तरप्रदेश की सीमा पर स्थित ज्वालामुखी माता मंदिर, जिले की प्रसिद्ध माड़ा गुफाएं, विवाह माता गुफा और लीलावर पहाड़ी जैसे स्थल ऐतिहासिक महत्व रखते हैं। विधायक ने कहा कि इन स्थलों का संरक्षण, जीर्णोद्धार और व्यवस्थित विकास किया जा, तो यह क्षेत्र प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में उभर सकता है।
विरासत को संरक्षित कर उसे पर्यटन से जोड़े
विधायक ने रिहंद डैम गोविंद बल्लभ पंत सागर के समीप बैढ़न क्षेत्र में बोट क्लब और आधुनिक पर्यटन पार्क विकसित करने का सुझाव भी रखा। उन्होंने कहा कि यहां पर्याप्त भूमि उपलब्ध है, जिसका उपयोग पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के लिए किया जा सकता है, जिससे स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। धार्मिक व्यवस्थाओं पर चिंता जताते हुए विधायक ने चतुर्भुज मंदिर के पुजारी लक्ष्मी प्रसाद द्विवेदी को वर्ष 2008 के बाद से मानदेय न मिलने का मुद्दा उठाया और इसे तत्काल बहाल करने की मांग की।
साथ ही हनुमान मंदिर ट्रस्ट बैढ़न, जय स्तंभ के जीर्णोद्धार, औड़ी हनुमान मंदिर तथा माड़ा गुफाओं में लगने वाले मेलों के आधुनिकीकरण और सुविधाओं के विस्तार पर भी जोर दिया। अपने उद्बोधन के अंत में विधायक ने कहा कि सिंगरौली की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित कर उसे पर्यटन से जोड़ना समय की मांग है। उन्होंने सरकार से ठोस और प्रभावी कदम उठाने का आग्रह करते हुए संबंधित सभी मांगों का समर्थन किया।
