कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने महिलाओं के अधिकारों, सम्मान और भविष्य के साथ विश्वासघात किया: खंडेलवाल

नयी दिल्ली, 22 अप्रैल (वार्ता) विधायिका में महिलाओं के आरक्षण से जुड़े 131वें संविधान संशोधन के लोकसभा में पूर्ण बहुमत से पारित नहीं होने को चाँदनी चौक से भारतीय जनता पार्टी सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में काला अध्याय बताया है और कहा है कि इस संशोधन विधेयक को गिराकर कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों ने महिलाओं के अधिकारों, सम्मान और भविष्य के साथ घोर विश्वासघात किया गया है।

श्री खंडेलवाल ने बुधवार को यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि यह केवल एक संशोधन विधेयक की हार नहीं, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं के अधिकारों, सम्मान और भविष्य के साथ किया गया घोर विश्वासघात है।

उन्होंने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों तृणमूल कांग्रेस, द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी सहित पूरे विपक्ष ने सुनियोजित षड्यंत्र के तहत इस संशोधन विधेयक को गिराने का शर्मनाक कार्य किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि श्री गांधी ने व्यक्तिगत और राजनीतिक स्वार्थों के चलते न केवल इस संशोधन विधेयक का विरोध किया, बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बनकर खड़े हो गए। यह आचरण उनके नेतृत्व की विफलता, दूरदृष्टि के अभाव और महिला सम्मान के प्रति असंवेदनशीलता को उजागर करता है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद ने कहा कि जिस प्रकार श्री गांधी ने सदन के भीतर मेज ठोक कर इस संशोधन विधेयक के गिराने का ऐलान किया और इसके खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया और उसके बाद विपक्षी दलों द्वारा विधेयक के गिरने का जश्न मनाया गया, वह अत्यंत निंदनीय, दुर्भाग्यपूर्ण और लोकतंत्र के मूल्यों का खुला उपहास है। यह स्पष्ट संकेत है कि श्री गांधी और उनके सहयोगी दल महिलाओं को अधिकार देने के बजाय उन्हें राजनीतिक लाभ-हानि के तराजू पर तौलते हैं।

श्री खंडेलवाल ने कहा कि जिस लोकसभा में श्री गांधी ने इस संशोधन विधेयक को गिरवाने का दुस्साहस किया है। वहीं, सदन भविष्य में इस ऐतिहासिक अन्याय को सुधारेगा और महिलाओं को उनका अधिकार देकर नया इतिहास रचेगा। उन्होंने कहा कि यदि यह संशोधन विधेयक पारित होता, तो कांग्रेस के भीतर प्रियंका गांधी एक सशक्त और प्रभावशाली नेतृत्व के रूप में उभर सकती थीं और संभवतः इसी राजनीतिक आशंका ने श्री गांधी को इस संशोधन विधेयक के विरोध के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए की गयी इस ऐतिहासिक पहल को विफल करना “महापाप” से कम नहीं है। श्री गांधी और विपक्ष ने अपने संकीर्ण राजनीतिक हितों के चलते देश की महिलाओं के सपनों को कुचलने का काम किया है, जिसे देश कभी नहीं भूलेगा।

श्री खंडेलवाल ने कहा कि कांग्रेस का इतिहास महिलाओं को केवल एक “वोट बैंक” के रूप में देखने का रहा है। दशकों तक इस महत्वपूर्ण मुद्दे को टालना और जब इसे लागू करने का समय आया, तब उसका विरोध करना,यह उनकी दोहरी नीति, अवसरवादी राजनीति और महिला विरोधी मानसिकता का स्पष्ट प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि शासन में महिला आरक्षण केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समान अवसर और राष्ट्र के समग्र विकास का आधार है। इसे रोकना देश की प्रगति को रोकने जैसा है।

उन्होंने कहा कि यह संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है। देश की महिलाएं और जागरूक नागरिक इस विश्वासघात का लोकतांत्रिक जवाब देंगे और उन सभी को जवाबदेह ठहराएंगे जिन्होंने उनके अधिकारों को कुचला है।

इस दौरान चांदनी चौक भाजपा के जिलाध्यक्ष श्री अरविंद गर्ग और केशवपुरम भाजपा के जिलाध्यक्ष अजय खटाना भी उपस्थित थे।

 

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