कोलकाता | पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सड़क किनारे ‘झालमुड़ी’ का स्वाद लेने पर राजनीति गरमा गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटना को “सुनियोजित ड्रामा” करार देते हुए तंज कसा है। खरदाहा और बीरभूम की रैलियों में ममता ने कहा कि पीएम ने पहले से ही दुकान में कैमरे लगवाए थे और उनके एसपीजी सुरक्षाकर्मियों ने नाश्ता तैयार किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पीएम कभी अपनी जेब में 10 रुपये भी रखते हैं? ममता ने प्रधानमंत्री के ‘चाय बेचने वाले’ अवतार की याद दिलाते हुए कहा कि अब वह चुनावी फायदे के लिए झालमुड़ी वाला बनने का दिखावा कर रहे हैं।
ममता बनर्जी ने पीएम मोदी को चुनौती देते हुए कहा, “सिर्फ झालमुड़ी क्यों, वह मछली और मांस क्यों नहीं ट्राई करते?” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में मछली, मांस और अंडे खाने पर पाबंदियां लगाई जा रही हैं और यदि भाजपा बंगाल में सत्ता में आती है, तो यहाँ भी वही खान-पान की पाबंदियां लागू की जाएंगी। टीएमसी सुप्रीमो ने महिलाओं से अपील की कि वे मतदान के दिन ‘पंता भात’ (भिगोया हुआ चावल) खाकर पोलिंग स्टेशनों पर डटी रहें और ईवीएम मशीनों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। उन्होंने भाजपा पर ‘परिसीमन’ के बहाने देश को बांटने का भी आरोप लगाया।
सियासी हमले के बीच, पीएम मोदी का झालमुड़ी खाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर रिकॉर्ड तोड़ रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इंस्टाग्राम पर 24 घंटे के भीतर इसे 10 करोड़ और फेसबुक पर 9 करोड़ से अधिक बार देखा गया है। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री के इस कदम के बाद गूगल पर ‘झालमुड़ी’ के लिए सर्च पिछले 22 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। जहाँ भाजपा इसे प्रधानमंत्री का जनता से जुड़ाव बता रही है, वहीं ममता बनर्जी ने इसे पूरी तरह से प्रचार का हिस्सा बताते हुए कहा कि बंगाल के लोग इस दिखावे को अच्छी तरह समझते हैं।

