अक्षय तृतीया पर सामाजिक समरसता का केंद्र रहा आमखेड़ा धाम

अशोकनगर। अक्षय तृतीया के अवसर पर श्री सिद्धधाम आमखेड़ा पर आयोजित कन्या विवाह सम्मेलन ने जिले में समाज में समानता, सहयोग और सामाजिक समरसता की मिशाल पेश की, जहां देशभर की विभिन्न समाज की कन्याओं का विवाह पीठाधीश्वर कल्याणदास महाराज के सानिध्य में हिन्दू रीति-रिवाज से सपन्न कराये गये। तो वहीं धाम की ओर वर-वधू को दहेज के रूप में अनेको उपहार दिये गये, जिनमें मुख्य रूप से मोटरसाईकिल, जेबरात और गृहस्थी का सामान शामिल रहा। दरअसल सिद्ध धाम आमखेड़ा पर आयोजित वैवाहिक सम्मेलन में जहां दूल्हे की बारात निकासी से लेकर बेटिया की विदाई करने सहित विभिन्न वैवाहिक रश्मे अदा की गई, तो वहीं इस सर्व समाज के सम्मेलन में पहुंचकर कई साधु-संतो सहित जनप्रतिनिधिओं ने अपना आर्शीवाद नवदंपत्ति को दिया। जिनमें मुख्य रूप से पूर्व सांसद डॉ.केपी यादव, विधायक इंजीनियर हरिबाबू राय, पूर्व विधायक जजपाल जज्जी शामिल रहे।

परिणय सूत्र में बंधे 25 जोड़े, बेटी की विदाई के दौरान हर आंख हुई नम:

श्री सिद्ध आमखेड़ा पर आयोजित सर्व समाज के कन्या विवाह सम्मेलन में देश के अलग-अलग राज्यों के जोड़े शामिल हुए। जिन्हें आगनी श्री सिद्ध बाबा को साक्षी मानकर सात फेरे लिये और नव दापत्य जीवन में प्रवेश किया। वैवाहिक सम्मेलन के दौरान सबसे भावुक पल उस समय आया, जब बेटियों को विदा की गई तो मौके पर मौजूद पीठाधीश्वर कल्याणदास महाराज सहित उपस्थित जनसमूह की आंखे नम हो गई।

दहेज में बाईक, जेबरात और गृहस्थी का दिया सामान:

इस सामूहिक कन्या विवाह सम्मेलन में बेटियों को धाम की ओर सोने, चांदी के जेबरात दिये जायेंगे, जिनमें सोने का मंगलसूत्र, चांदी की पायल, बिचूड़ी, सोने का कांटा एवं चांदी का गुच्छा शामिल था। इसके अलावा गृहस्थी में उपयोग होने वाले अलमारी, डे्रसिंग, पलंग, सिलाई मशीन, मिक्सी, टेबिल फैन, कूलर, वॉशिंग मशीन, पूजा की थाली दी गई। साथ ही प्रत्येक दूल्हे को उपहार स्वरूप मोटरसाईकिल प्रदान की गई। वहीं विदा से पहले नवदंपती को रामायण भेंट करते सद् मार्ग पर चलने का वाचन लिया गया।

भजन संध्या में मुखिया बोले गाय में विराजमान समस्त देवी-देवता: कन्या विवाह सम्मेलन के अवसर पर एक दिन पूर्व जहां धाम पर बेटियों की हल्दी, मेहंदी की रश्म कराई गई, तो वहीं बुदेलखंड के प्रसिद्ध गायक रामकिशोर मुखिया की भजन संध्या का आयोजन किया गया। जहां मुखिया जी द्वारा एक से बड़कर एक भजनों और बुंदेली गीतों की प्रस्तुति देकर उपस्थित श्रोताओं को सुबह होने तक झूमने पर मजबूर कर दिया। इस दौरान उन्होंने कलयुग रीत सुनाते हुए कहा कि गाय जिसें हम गौमाता कहते है, उसी में ब्राहड के समस्त देवी-देवता विराजमान है, इसलिए सभी को गौमाता की सेवा करना चाहिए।

 

 

 

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