आयरलैंड में वायरल फोटो पर मचा बवाल… भारतीय छात्रों के खिलाफ नस्लवादी टिप्पणियों की आई बाढ़

आयरलैंड में यूनिवर्सिटी फूड पेंट्री की फोटो वायरल होने के बाद भारतीय छात्रों को नस्लवाद का सामना करना पड़ रहा है। बिना सबूत उन पर सुविधाओं के दुरुपयोग के आरोप लगाए जा रहे हैं।

आयरलैंड की एक यूनिवर्सिटी में फूड पेंट्री के बाहर छात्रों की लंबी कतार वाली तस्वीर ने सोशल मीडिया पर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इस फोटो के वायरल होते ही भारतीय छात्रों के खिलाफ नस्लवादी टिप्पणियों और नफरत की एक नई लहर पैदा हो गई है। बिना किसी ठोस प्रमाण के आलोचकों ने भारतीय समुदाय पर मुफ्त सुविधाओं के गलत इस्तेमाल का गंभीर आरोप लगाया है। यह घटना आयरलैंड में बढ़ते जेनोफोबिया और भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा को लेकर कई बड़े सवाल खड़े करती है।

वायरल फोटो और विवाद

यूनिवर्सिटी ऑफ गॉलवे की एक रिपोर्ट में बढ़ती महंगाई के कारण छात्रों को मुफ्त भोजन के लिए कतारों में खड़ा दिखाया गया था। सोशल मीडिया यूजर्स ने बिना किसी सबूत के यह दावा करना शुरू कर दिया कि कतार में खड़े 90% लोग भारतीय ही थे। कुछ लोगों ने इसे भारतीयों की पुरानी आदत बताते हुए इसे पैसे बचाने का एक ‘लाइफ-हैक’ करार दिया है।

महंगाई और आवास संकट

हकीकत यह है कि आयरलैंड इस समय भीषण आवास संकट से जूझ रहा है और छात्रों को रहने के लिए €1,000 तक किराया देना पड़ रहा है। ‘द आयरिश टाइम्स’ की रिपोर्ट में कहीं भी यह नहीं लिखा था कि कतार में खड़े छात्र केवल भारतीय मूल के ही थे। भोजन वितरण करने वाली इस संस्था ने पिछले साल करीब 5 लाख यूरो मूल्य का भोजन जरूरतमंदों के बीच वितरित किया था।

बढ़ती हिंसक घटनाएं

यह ऑनलाइन नफरत ऐसे समय में आई है जब आयरलैंड में भारतीयों के खिलाफ पहले ही कई हिंसक हमले और हेट क्राइम दर्ज हुए हैं। हाल ही में अमेज़न में काम करने वाले एक भारतीय पेशेवर पर चाकू से हमला किया गया और संतोष यादव की चेहरे की हड्डी तोड़ दी गई। इन बढ़ती वारदातों ने वहां रह रहे और पढ़ाई कर रहे भारतीय समुदाय के मन में असुरक्षा और डर का माहौल बना दिया है।

दूतावास की प्रतिक्रिया

भारत स्थित आयरिश दूतावास ने इन बढ़ती चिंताओं को स्वीकार करते हुए नस्लीय घटनाओं को एक बहुत ही गंभीर विषय बताया है। दूतावास के अनुसार आयरलैंड एक समावेशी देश है लेकिन हालिया घटनाओं ने वहां के प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। आईटी और चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में 1,00,000 से अधिक भारतीय वर्तमान में आयरलैंड की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान दे रहे हैं।

अफवाहों का प्रभाव

सोशल मीडिया पर फैली इन निराधार अफवाहों ने भारतीय छात्रों के लिए वीजा चुनौतियों और बढ़ते किराये के बीच एक नई मुसीबत खड़ी कर दी है। आधिकारिक आंकड़ों के अभाव में भी भारतीयों को जानबूझकर निशाना बनाया जाना वहां के समाज में बढ़ते जेनोफोबिया को दर्शाता है। छात्रों को अब न केवल आर्थिक तंगी बल्कि इस तरह के मानसिक और सामाजिक दबाव का भी सामना करना पड़ रहा है।

 

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