तेहरान, 20 अप्रैल (वार्ता) ईरान ने सोमवार को कहा कि अमेरिका-इजरायल की ओर से शुरू किया गया युद्ध अपने किसी भी उद्देश्य को हासिल करने में विफल रहा है। ईरान ने चेतावनी दी कि अमेरिका को बातचीत की मेज पर उस सफलता की उम्मीद नहीं करनी चाहिए, जिसे वह युद्ध के मैदान में हासिल करने में नाकाम रहा है। रूस के समाचार पत्र ‘वेदोमोस्ती’ को दिये साक्षात्कार में, रूस में ईरान के राजदूत काजेम जलाली ने कहा कि ईरान के खिलाफ अभियान हर मोर्चे पर विफल रहा है। उन्होंने अमेरिका-इजरायल के उन दावों को खारिज कर दिया कि वे सैन्य रूप से ईरान को तेजी से हरा सकते हैं और सत्ता परिवर्तन कर सकते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि उनका इनमें से कोई भी लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। ‘अल जजीरा’ के साथ एक अन्य साक्षात्कार में युद्ध के नतीजों पर सवाल उठाते हुए श्री जलाली ने कहा, “उन्होंने कहा था कि वे कुछ ही दिनों में ईरान पर कब्जा कर लेंगे। वे अपने किस उद्देश्य में सफल हुए? किसी में नहीं। अमेरिका-इजरायल के हमले नाकाम रहे हैं।”
श्री जलाली ने तंज कसते हुए कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका के लक्ष्य सिमटते जा रहे हैं— व्यापक राजनीतिक परिवर्तन से लेकर अब वे हॉर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने जैसी रणनीतिक चिंताओं तक आ गये हैं। उन्होंने तर्क दिया कि अमेरिका की ये महत्वाकांक्षाएं भी पूरी नहीं हुईं। उन्होंने कहा, “शुरुआत में वे सत्ता परिवर्तन चाहते थे, लेकिन अब वे उस स्थिति में आ गये हैं, जहां वे केवल हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना चाहते हैं। यह भी विफल रहा है। और उन्होंने जिस समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की है, उसका कोई मतलब नहीं है, क्योंकि भविष्य की कार्रवाइयों के लिए हमारे पास फौलादी इरादे हैं।”
उन्होंने अमेरिकी समुद्री नाकेबंदी की प्रभावशीलता को भी खारिज कर दिया और इसे ईरान के ‘फौलादी इरादों’ के खिलाफ निरर्थक प्रयास बताया। श्री जलाली ने कहा कि इस संघर्ष ने ईरान को कमजोर करने के बजाय अंततः उसके संकल्प को और अधिक मजबूती दी है। अमेरिका के साथ बातचीत के संबंध में राजदूत ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान दबाव में किसी भी एकतरफा समझौते को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने तर्क दिया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बातचीत के जरिये वह हासिल नहीं कर पायेंगे, जिसे वे सैन्य रूप से पूरा करने में विफल रहे।
श्री जलाली ने कहा, “जो युद्ध के दौरान हासिल नहीं हुआ, वह बातचीत की मेज पर भी हासिल नहीं होगा।” उन्होंने आगे कहा कि कोई भी समझौता संतुलित और दोनों पक्षों की जीत वाले फॉर्मूले पर आधारित होना चाहिए। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आयी है, जब ईरान-अमेरिका के बीच दो सप्ताह का संघर्ष विराम 22 अप्रैल को समाप्त होने वाला है। इससे पहले इस्लामाबाद में हुई बातचीत बिना किसी प्रगति के समाप्त हो गयी थी, जिसमें दोनों पक्ष हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर गतिरोध में फंसे रहे। संघर्ष विराम के अंत के करीब पहुंचने के साथ, राजनयिक इस रुकी हुई बातचीत को निर्णायक मोड़ के रूप में देख रहे हैं। जहां एक ओर अमेरिका का मानना है कि ‘उचित और तर्कसंगत’ समझौता अब भी संभव है, वहीं ईरान के दमनकारी स्थितियों में बातचीत करने से इनकार करने से संकेत मिलता है कि तनाव दोबारा बढ़ने का जोखिम अभी बना हुआ है।

