मुंबई | देश में महिला आरक्षण बिल (Women’s Reservation Bill) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान पर कड़ा प्रहार किया है, जिसमें उन्होंने विपक्ष को महिलाओं की नाराजगी झेलने की चेतावनी दी थी। राउत ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को विपक्ष को डराना और धमकियां देना बंद करना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता मालिक होती है और धमकियों के दम पर राजनीति नहीं की जा सकती। राउत के अनुसार, बीजेपी महिलाओं का दिल जीतने के बजाय डराकर और लालच देकर राजनीति कर रही है।
संजय राउत ने महाराष्ट्र की ‘माझी लाडकी बहिन योजना’ और अन्य राज्यों की इसी तरह की प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) योजनाओं को ‘वोट खरीदने का पैटर्न’ करार दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री को ललकारते हुए कहा, “अगर आपमें वाकई हिम्मत है, तो चुनाव से पहले महिलाओं के खातों में जो पैसे भेजे जा रहे हैं, उन्हें बंद करके दिखाएं।” राउत ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में 2-2 हजार रुपये और अन्य राज्यों में दी जा रही भारी-भरकम राशि केवल चुनावी वैतरणी पार करने के लिए सरकारी खजाने का दुरुपयोग है। उन्होंने चुनौती दी कि पैसा बांटना बंद करके मैदान में उतरें, तब पता चलेगा कि कितनी महिलाएं स्वेच्छा से साथ हैं।
संजय राउत का यह तीखा पलटवार पीएम मोदी के उस भाषण के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि नारी शक्ति का विरोध करने वालों को देश कभी माफ नहीं करेगा। जहां प्रधानमंत्री इसे महिलाओं को अधिकार देने की जिम्मेदारी बता रहे हैं, वहीं राउत ने इसे ‘कैश-फॉर-वोट’ मॉडल करार दिया है। शिवसेना (UBT) नेता ने दावा किया कि बिहार से लेकर महाराष्ट्र तक सरकारी पैसों के दम पर चुनाव जीतने की कोशिश की जा रही है, जो नीतिगत बदलावों के बजाय महज एक चुनावी खेल है। राउत के इस बयान ने अब महाराष्ट्र से दिल्ली तक राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।

