
जबलपुर। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बैतूल की माचना नदी के पुनरुद्धार के लिए दीर्घकालिक कार्य योजना बनाने का आदेश दिया है। वैज्ञानिक व सतत सफाई उपाय अपनाने पर भी जोर दिया है। यह कदम नदी की खराब स्थिति की रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लेते हुए उठाया गया। रिपोर्ट के अनुसार लगभग सात लाख लोगों की जीवन रेखा मानी जाने वाली माचना नदी जलकुंभी और अन्य जलीय खरपतवारों से गंभीर रूप से प्रभावित है। कई स्थानों पर नदी का जल दिखाई भी नहीं देता, जिससे जल में आक्सीजन की कमी, मच्छरों का प्रकोप व डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। पूर्व में मशीनों के माध्यम से सफाई पर भारी खर्च होने के बावजूद समस्या फिर से उत्पन्न हो गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि केवल अस्थायी उपाय पर्याप्त नहीं हैं। अधिकरण ने पूर्व में इसी प्रकार के मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि विशेषज्ञों के अनुसार जैविक एवं रासायनिक उपाय प्रभावी या सुरक्षित नहीं हैं। यांत्रिक सफाई के साथ नियमित रख रखाव ही उपयुक्त समाधान है। इसी आधार पर अधिकरण ने जल संसाधन विभाग, कलेक्टर बैतूल तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी बैतूल को आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं, जिसमें जलीय खरपत वारों की मैनुअल व तकनीकी सफाई तथा दीर्घकालिक नदी प्रबंधन शामिल है। संबंधित अधिकारियों को छह माह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट एनजीटी रजिस्ट्रार, केंद्रीय क्षेत्र पीठ भोपाल को प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
