तेहरान, 16 अप्रैल (वार्ता) अमेरिका से मिले एक नए संदेश के साथ, पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के प्रयास में ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता के एक नए दौर की संभावना पर ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहा है।
सात अप्रैल को शुरू हुआ दो सप्ताह का नाजुक युद्धविराम 22 अप्रैल को समाप्त होने वाला है। इस्लामाबाद में रविवार को बिना किसी समझौते के समाप्त हुई प्रारंभिक वार्ता के बाद पाकिस्तान आगे की वार्ता के लिए समन्वय कर रहा है।
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी मध्यस्थता प्रयासों में शामिल हैं जबकि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ राजनयिक वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए चार दिवसीय खाड़ी दौरे के पहले पड़ाव के रूप में सऊदी अरब में हैं।पाकिस्तानी अधिकारी दूसरे दौर की वार्ता के लिए युद्धविराम को बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं और क्षेत्रीय साझेदारों को यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे अमेरिका पर प्रभाव का इस्तेमाल करके ईरान के साथ फिर से बातचीत शुरू करें जिससे कोई राजनयिक गलती न हो।
यह राजनयिक प्रयास अमेरिका और ईरान की नौसैनिक नाकाबंदी के कारण बढ़े तनाव के बीच किया जा रहा है जो क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल रहा है। हालांकि इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक समझौते की दिशा में संभावित प्रगति के संकेत मिल रहे हैं।
गौरतलब है कि अमेरिका इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष में अब तक लगभग 3,000 लोग मारे गए हैं और यह पश्चिम एशिया में फैल गया है। अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता को उस समय और गति मिली जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आने वाले ‘अद्भुत दो दिनों’ का वर्णन किया, जिससे संकेत मिला कि ईरान के साथ युद्ध अपने अंत के करीब हो सकता है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि समझौते की संभावनाएं आशाजनक लग रही हैं। इसके बावजूद, अमेरिकी सेना ने ईरान के सभी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकाबंदी की हुई है और वह “मौजूद, सतर्क और अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए तैयार” हैं।
ईरानी सेना ने इस नाकाबंदी को युद्धविराम का उल्लंघन बताया है और बुधवार तक इसके कारण नौ जहाजों को वापस लौटना पड़ा है। ईरान के संयुक्त सैन्य कमांडर अली अब्दुल्लाही ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका नाकाबंदी नहीं हटाता है तो तेहरान लाल सागर, खाड़ी और ओमान सागर के रास्ते व्यापार अवरुद्ध करके जवाबी कार्रवाई कर सकता है। वार्ता में मुख्य विवाद के कारणों में ईरान का परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और युद्धकालीन क्षति के लिए मुआवजा शामिल हैं।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि तेहरान यूरेनियम संवर्धन के स्तर पर बातचीत के लिए तैयार है लेकिन इस बात पर बल देता है कि देश को अपनी जरूरतों के आधार पर संवर्धन करने की क्षमता बनाए रखनी चाहिए।
इसी संदर्भ में, चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची को कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना एक अंतरराष्ट्रीय प्राथमिकता है। श्री वांग ने इस बात पर बल दिया कि जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले जहाजों की स्वतंत्रता एवं सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए ईरान की संप्रभुता और सुरक्षा का सम्मान करना चाहिए और सामान्य आवागमन की बहाली को अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सर्वसम्मत अपील बताया।
इसी बीच, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की योजना की घोषणा की और नए प्रतिबंधों को बमबारी अभियान के वित्तीय समकक्ष के रूप में वर्णन किया। ईरान के साथ आगे की बातचीत इस्लामाबाद में होने की उम्मीद है हालांकि अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। पाकिस्तान इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान की सीधी बातचीत की मेजबानी करने के बाद एक प्रमुख मध्यस्थ बन गया है।
