रक्सौल/काठमांडू | मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की अस्थिरता का सीधा असर पड़ोसी देश नेपाल पर पड़ा है। नेपाल ऑयल निगम ने ईंधन की कीमतों में पिछले एक महीने के भीतर लगातार पांचवीं बार भारी वृद्धि की है। 16 अप्रैल की रात से लागू नई दरों के अनुसार, नेपाल में अब एक लीटर डीजल की कीमत ₹234.50 और पेट्रोल की कीमत ₹216.50 तक पहुंच गई है। इस वृद्धि ने न केवल यातायात को महंगा कर दिया है, बल्कि आम नागरिकों के सामने जीवन-यापन का गंभीर संकट भी खड़ा कर दिया है।
इज़राइल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर दिया है, जिससे नेपाल ऑयल निगम को अब तक करीब 7 अरब 81 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का अनुमान है। सरकार द्वारा कस्टम ड्यूटी में 50 प्रतिशत की भारी छूट देने के बावजूद निगम को डीजल पर प्रति लीटर ₹87.90 का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उथल-पुथल मचने से निगम के पास कीमतें बढ़ाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा था, जिससे अब रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम भी बढ़ने की आशंका है।
कभी भारत के मुकाबले सस्ता ईंधन बेचने वाले नेपाल की स्थिति अब पूरी तरह उलट चुकी है। भारतीय रुपये के हिसाब से तुलना करें तो रक्सौल में डीजल ₹93.24 है, जबकि नेपाल में यह ₹146.56 का पड़ रहा है। इसी तरह रक्सौल में पेट्रोल ₹106.97 है, जबकि नेपाल में यह भारतीय मुद्रा के अनुसार ₹135.31 बैठता है। कीमतों में इस भारी अंतर के कारण अब सीमावर्ती क्षेत्रों में हलचल तेज हो गई है और नेपाल के लोग ईंधन के लिए भारतीय बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं, जो दोनों देशों के बीच एक नई आर्थिक बहस को जन्म दे रहा है।

