इंदौर: शहर के होनहार विद्यार्थियों ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है. कड़ी मेहनत, सही रणनीति और परिवार व शिक्षकों के सहयोग से छात्रों ने प्रदेश स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर शहर को गौरवान्वित किया है. 12वीं कक्षा में तन्वी कुमावत ने बायो में पहली रैंक हासिल की है और अथर्व देशमुख ने मैथ्य विषय में 7वीं रैंक बनाई है. वहीं कृष्णा खाजेकर ने दसवी कक्षा में प्रदेश में नवीं रैंक हासिल की है.
12 घंटे पढ़ाई और संतुलन से मिली कामयाबी अथर्व देशमुख ने 500 में से 486 अंक लाकर मध्य प्रदेश में 12वीं कक्षा के मैथ्य विषय में सातवीं रैंक हासिल की. अथर्व ने अपनी सफलता का श्रेय नियमित पढ़ाई और अनुशासन को दिया. वे रोजाना 10 से 12 घंटे पढ़ाई करते हैं और फिजिक्स व मैथ्स में विशेष रुचि रखते हैं, हालांकि सभी विषयों को बराबर समय देते हैं. पढ़ाई के दौरान परिवार का सहयोग उनके लिए सबसे बड़ी ताकत रहा.
उनकी मां खासतौर पर उनके शेड्यूल का ध्यान रखती हैं ताकि पढ़ाई में निरंतरता बनी रहे. थकान होने पर अथर्व क्रिकेट खेलकर खुद को तरोताजा करते हैं. उनके पसंदीदा खिलाड़ी विराट कोहली हैं. भविष्य को लेकर उनका लक्ष्य स्पष्ट है- वे आईआईटी में प्रवेश लेकर कंप्यूटर इंजीनियर बनना चाहते हैं और आगे चलकर गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए काम करना चाहते हैं. खास बात यह है कि अथर्व के जुड़वां भाई शुभांग ने भी शानदार 93त्न अंक हासिल किए हैं.
निरंतर मेहनत बनी सफलता की कुंजी
तन्वी कुमावत ने 500 में से 492 अंक प्राप्त कर मध्य प्रदेश में पहली रैंक हासिल की. वे बताती हैं कि उन्हें इतनी बड़ी उम्मीद नहीं थी, लेकिन मेहनत और शिक्षकों के मार्गदर्शन से यह संभव हो पाया. उन्होंने अपनी तैयारी में एनसीईआरटी की किताबों को प्राथमिकता दी और फिजिक्स में कॉन्सेप्ट्स को मजबूत किया. तन्वी का सपना डॉक्टर बनना है, जिसके लिए वे आगे भी मेहनत जारी रखेंगी. उनकी मां ने बेटी की सफलता पर गर्व जताया, वहीं स्कूल की प्रिंसिपल अश्विनी शाजापुरकर ने बताया कि तन्वी को शुरू से ही शिक्षकों का पूरा सहयोग मिला है, जिससे उसकी नींव मजबूत बनी.
सोशल मीडिया से दूरी और लक्ष्य बना सफलता का आधार
कृष्णा खाजेकर ने 500 में से 491 अंक प्राप्त कर दसवीं में मध्य प्रदेश में नवी रैंक और इंदौर में पहली रैंक हासिल किया. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय एकाग्रता और अनुशासन को दिया. उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बनाकर पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित किया. हालांकि पढ़ाई के लिए इसका सीमित उपयोग किया, लेकिन खुद को उससे विचलित नहीं होने दिया. उनकी पढ़ाई की रणनीति बेहद सरल थी- हर दिन एक चैप्टर पूरा करना और लक्ष्य हासिल होने तक लगातार मेहनत करना. भविष्य में वे 11वीं में गणित विषय चुनना चाहती हैं और उनका सपना इसरो में रूचि है और आई ए एस बनना चाहतीं है.
