नई दिल्ली | दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट की जज जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के खिलाफ एक नया और बेहद चौंकाने वाला हलफनामा दाखिल किया है। केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि जस्टिस शर्मा के दोनों बच्चे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अधीन काम करते हैं, जो इस मामले में जांच एजेंसी सीबीआई और ईडी की पैरवी कर रहे हैं। हलफनामे में दावा किया गया है कि चूंकि तुषार मेहता उनके बच्चों को केस देते हैं, इसलिए ऐसी स्थिति में जस्टिस शर्मा से निष्पक्ष फैसले की उम्मीद करना कठिन है। केजरीवाल ने ‘कन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट’ (हितों के टकराव) की दलील देते हुए जस्टिस शर्मा से मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने (Recuse) की मांग की है।
केजरीवाल ने अपने आवेदन में जस्टिस शर्मा की न्यायिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने दलील दी कि 9 मार्च की सुनवाई में आरोपियों का पक्ष सुने बिना और रिकॉर्ड मंगवाए बिना ही सेशंस कोर्ट के आदेश को ‘प्रथम दृष्टया’ गलत बता दिया गया। साथ ही, उन्होंने कोर्ट की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि जस्टिस शर्मा अन्य मामलों में लंबी तारीखें देती हैं, लेकिन इस जटिल केस में जवाब दाखिल करने के लिए महज एक हफ्ते का समय दिया गया। केजरीवाल का आरोप है कि जांच एजेंसियों द्वारा मौखिक रूप से कही गई बातों को भी आदेश का हिस्सा बना लिया जाता है, जिससे आरोपियों के प्रति ‘पूर्वाग्रही’ रवैया झलकता है।
हलफनामे में जस्टिस शर्मा के वैचारिक झुकाव पर भी उंगली उठाई गई है। इसमें कहा गया है कि जस्टिस शर्मा आरएसएस की वकीलों वाली शाखा ‘अधिवक्ता परिषद’ की बैठकों में हिस्सा ले चुकी हैं, जो आरोपियों के प्रति पूर्वाग्रह का कारण हो सकता है। इसके अतिरिक्त, केजरीवाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एक हालिया साक्षात्कार का हवाला दिया, जिसमें शाह ने कहा था कि केजरीवाल को हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ेगा। केजरीवाल का दावा है कि फैसले से पहले ही गृह मंत्री को इसके परिणाम का पता होना संकेत देता है कि प्रक्रिया पूर्व-निर्धारित है।

