जबलपुर: वेटरनरी यूनिवर्सिटी के साथ एक बार फिर से अन्याय हुआ है इसको लेकर अब विरोध के स्वर उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार जबलपुर वेटरनरी यूनिवर्सिटी के अंतर्गत विदिशा में स्थापित होने वाले कृषि विज्ञान केंद्र को उससे छीनकर भोपाल में आयसीएआर की संस्था को प्रदान किया गया है। वहीं पिछले 6 वर्ष पूर्व में इस यूनिवर्सिटी में ग्राम इमलिया में डेयरी साइंस कालेज खोलने के लिए भूमि तथा बजट आवंटित किया गया था, लेकिन अब उसे जबलपुर से छिनकर उज्जैन में स्थापित किया गया है।
जनसंगठनों ने म.प्र.शासन के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर मामले की उच्चस्तरीय जाँच की मांग की है।डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने नवभारत को बताया कि समूचे भारत में जबलपुर वेटरनरी यूनिवर्सिटी ही एक मात्र विश्वविद्यालय है, जहाँ उसके पास एक भी कृषि विज्ञान केंद्र नहीं है, जबकि इस विश्वविद्यालय के स्थापना को अब 15 वर्ष बीत चुके हैं।
वेटरनरी यूनिवर्सिटी के विखण्डन की आशंका
वेटरनरी यूनिवर्सिटी से संस्थायें छीनकर उन्हें उज्जैन और भोपाल में स्थापित करने से जबलपुर वेटरनरी यूनिवर्सिटी के विखण्डन की आशंका निर्माण हो रही है। जनसंगठनों ने आंदोलन करने का निर्णय लेकर विरोध दर्शाना तय किया है। इस संबंध में एक बैठक आयोजित की गई जिसमें डॉ. पी.जी. नाजपांडे, रजत भार्गव, टी. के. रायघटक, डी. के. सिंग, सुभाष चंद्रा, सुशिला कनौजिया, गीता पांडे, एड. वेदप्रकाश अधौलिया, डी.आर. लखेरा, संतोष श्रीवास्तव, एड.जी.एस. सोनकर, पी.एस. राजपूत आदि उपस्थित थे।
