नयी दिल्ली, 14 अप्रैल (वार्ता) दिल्ली सरकार ने राजधानी में यमुना की बाढ़ से बचाने वाली दीवार के निर्माण को हरी झंडी दे दी है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को इस निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने तत्कालीन बजट में इस दीवार के निर्माण का प्रस्ताव पारित किया है। यह दीवार न केवल यमुना के पानी को रिहायशी इलाकों में घुसने से रोकेगी, बल्कि सिविल लाइंस, कश्मीरी गेट, यमुना बाजार और मजनू का टीला जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के लिए एक अभेद्य सुरक्षा कवच का काम करेगी। दशकों से ऐसा होता आ रहा है कि जब भी यमुना में जलस्तर बढ़ता है तो मजनू का टीला और उसके आसपास के निचले इलाकों से ही पानी सबसे पहले राजधानी में प्रवेश करता है। वर्ष 1978 की भीषण बाढ़ से लेकर 2023 और वर्ष 2025 की बाढ़ तक, रिंग रोड का यह हिस्सा जलमग्न होने के कारण पूरी दिल्ली की रफ्तार रोक देता था। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान तटबंध (पुश्ते) भविष्य की चुनौतियों के लिए पर्याप्त नहीं हैं, इसलिए अब सरकार स्थायी समाधान की ओर बढ़ रही है।
उन्होंने बताया कि यमुना के किनारे बनने वाली यह दीवार नदी और शहर के बीच एक मजबूत ढाल बनेगी, जिससे नदी का पानी ओवरफ्लो होकर सड़कों पर नहीं आएगा। इस दीवार से नदी के किनारों को कटने से बचाया जा सकेगा, जिससे सड़कों और आसपास की इमारतों की नींव सुरक्षित रहेगी। इसके अतिरिक्त यह दीवार नदी के किनारे होने वाली अवैध वेस्ट डंपिंग और म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट को रोकने में मदद करेगी, जिससे यमुना का फ्लड-प्लेन सुरक्षित और नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि दिल्ली सरकार इस प्रोजेक्ट को युद्धस्तर पर पूरा करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। इस पूरी दीवार को अगले मॉनसून सीजन 2027 से पहले तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल बाढ़ से सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहरी अवसंरचना को सुदृढ़ करने, पर्यावरण संरक्षण और नागरिकों के जीवन स्तर को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक प्रभावी पहल है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस दीवार के निर्माण के बाद दिल्ली को हर वर्ष आने वाली बाढ़ की समस्या से स्थायी राहत मिलेगी।
