
ब्यावरा। बारिश के दिनों में कई मुख्य मार्गो के रास्ते पर मौजूद रपटें जलमग्न होने से आवाजाही थम जाती है, एक बार फिर आने वाले बारिश के दिनों में इसी तरह के हालातों से गुजरने को मजबूर होना पड़ेगा. क्योंकि अत्यधिक नीचे की और स्थित रपटो की हाईट बढ़ाने किसी प्रकार की कोई पहल नहीं हो सकी है.
गौरतलब है कि घुरेल मार्ग, बिसौनिया मार्ग सहित कई जगह पर नदी, नालों पर बनी रपटो की हाईट बहुत ही नीचे की ओर होने से बारिश में आये दिन रपटो पर पानी आने से आवाजाही घंटो तक थम जाती है.
कई बार जलमग्न हो जाता है रपटा
सुठालिया रोड पर स्थित प्रसिद्ध घुरेल धाम के सामने से गुजर रही घोड़ापछाड़ नदी पर काफी कम हाईट का रपटा बना हुआ है, जो थोड़ी बहुत बारिश होने पर ही जलमग्न हो जाता है. गत बारिश में सावन माह में कई बार रपटे पर पानी आने से आवागमन कई घंटे तक बंद रहा. जिसके कारण कई गांवों का आवागमन रुक गया तथा श्रद्धालुओं को घुरेल धाम पहुंचने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. इस रपटे से होकर ग्राम लालपुरिया, रतनपुरिया, भूकनी, बरखेड़ी, कांदरियाखेड़ी, सारसियाबे, तरैना, हयातपुरा, टोंका, नेठाठारी पहुंचने का रास्ता जाता है. रपटे के स्थान पर हाईट देते हुए पुलिया निर्माण किए जाने की मांग लम्बे समय से की जा रही है ताकि बारिश के दिनों में आवागमन बाधित न हो. किंतु इस और कोई ठोस पहल नहीं होने से इस बारिश में भी इस समस्या का सामना करने को मजबूर होना पड़ेगा.
बिसौनिया मार्ग के रपटे पर भी आ जाता है पानी
ब्यावरा-सुठालिया मार्ग पर ही बिसौनिया जाने वाले मार्ग पर भी इसी तरह की समस्या बारिश में निर्मित होती है. मार्ग पर मौजूद रपटे की हाईट भी कम होने से बारिश में चाहे जब आवागमन बाधित हो जाता है. यह मार्ग ग्राम बेड़ाबे, हरनाथपुरा, नापानेरा, नेवज, नेवली, बांसखो, तलावपुरा, धोलाभाटा, बिसौनिया जाने के लिए मुख्य मार्ग है.
