जबलपुर: चरगवां क्षेत्र में तीन महीने से चले आ रहे जमीन विवाद को लेकर सोमवार को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की। राजस्व टीम ने मौके पर पहुंचकर नपाई की और पूरी भूमि को अलग-अलग हिस्सों में चिन्हित किया। एसडीएम मदन सिंह रघुवंशी के अनुसार, सीमांकन के दौरान कब्रिस्तान और चारागाह की भूमि को अलग-अलग नंबरों में दर्ज किया गया है। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि विवादित क्षेत्र का अधिकांश भाग चारागाह भूमि में आता है, जबकि कब्रिस्तान का हिस्सा अधिकतर सड़क पर आ रहा है और केवल सीमित हिस्सा ही शेष पाया गया है। प्रशासनिक कार्रवाई के बाद अब भूमि की वास्तविक स्थिति को लेकर काफी हद तक स्थिति स्पष्ट हो गई है।
भारी पुलिस बल रहा तैनात
कार्यवाही के दौरान भारी पुलिस बल—चरगवां, बरगी और भेड़ाघाट थानों की संयुक्त मौजूदगी में राजस्व विभाग की टीम ने विवादित भूमि का सीमांकन (नपाई) किया। पूरा इलाका एहतियातन पुलिस छावनी में तब्दील रहा ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति न बने।
शव दफनाने को लेकर दो पक्ष आए थे आमने-सामने
विदित है कि यह विवाद उस समय शुरू हुआ था जब ग्राम बड़ैयाखेड़ा की फतीमा बी के निधन के बाद शव दफनाने को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए थे। हिंदू संगठनों ने आरोप लगाया था कि जिस भूमि पर दफन किया जा रहा है वह सरकारी चारागाह है, जबकि मुस्लिम पक्ष का कहना था कि यह दशकों पुराना कब्रिस्तान है जहां पहले से दफनाने की परंपरा रही है। उस दौरान विवाद इतना बढ़ गया था कि मामला चक्काजाम तक पहुंच गया था और जबलपुर-गोटेगांव मार्ग बाधित हो गया था। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन की मौजूदगी में अंतिम संस्कार जबलपुर में किया गया था। इसके बाद प्रशासन ने आश्वासन दिया था कि भूमि का विधिवत सीमांकन कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाएगी, लेकिन यह प्रक्रिया पहले निर्धारित तिथि पर नहीं हो सकी थी।
इनका कहना है
नपाई में कब्रिस्तान की आधे से ज्यादा भूमि सड़क पर आ रही है, छोटी सी जगह ही उस कब्रिस्तान के हिस्से में आई है। दोनों ही भूमि को अलग-अलग नपाई कर चिह्नित कर दिया गया है।
मदन सिंह रघुवंशी, एसडीएम
