जबलपुर: नारी सशक्तिकरण आज की सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक आवश्यकता है। महिलाओं को समान अधिकार, अवसर और सम्मान मिलने से ही देश और समाज का समग्र विकास संभव है। उन्होंने नारी शक्ति को इंद्रधनुष के सात रंगों के समान बताते हुए इसे सशक्त महिला नेतृत्व की दिशा में सकारात्मक पहल है। उक्त बातें रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के विधि विभाग द्वारा आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 पर मंथन’ कार्यक्रम में प्रभारी कुलगुरु प्रो. राकेश बाजपेयी ने कही। प्रभारी कुलसचिव प्रो. सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सरकार द्वारा अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं और यह अधिनियम उनमें एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित
विधि विभागाध्यक्ष प्रो. दिव्या चंसोरिया ने बताया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 (106वां संवैधानिक संशोधन) के तहत लोकसभा, दिल्ली विधानसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई हैं। अर्जुन अवार्डी हॉकी खिलाड़ी मधु यादव ने महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने और बालिकाओं को शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाने का संदेश दिया। डॉ. ऋचा धीरावाणी ने महिलाओं की 50-50 भागीदारी को लक्ष्य बताते हुए उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। विधि विशेषज्ञ डॉ. अंकिता बिसेन ने बताया कि आरक्षित सीटों में से एक-तिहाई सीटें अनुसूचित जाति एवं जनजाति की महिलाओं के लिए होंगी तथा यह कानून परिसीमन के बाद लागू होगा। हाईकोर्ट लीगल एड. दिव्यकीर्ति बोहरे ने कहा कि यह अधिनियम नीति-निर्माण में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाकर समावेशी विकास को बढ़ावा देगा। योगाचार्य कल्पना सिंह ने इसे महिलाओं को राष्ट्र निर्माण में अवसर देने वाला कदम बताया, जबकि शिक्षा संकायाध्यक्ष प्रो. अलका नायक ने इसे लैंगिक समानता की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताया।
इनकी रही भागीदारी
कार्यक्रम का संचालन छात्रा हिमांशी मोरे ने किया तथा आभार प्रदर्शन डॉ. देवीलता रावत ने किया। कार्यक्रम में डॉ. अश्विनी जायसवाल, डॉ. अर्पण शुक्ला, डॉ. उमाकांत गजवीर, डॉ. नीना प्यासी, कैप्टन सुनील शर्मा, डॉ. सुजाता श्रीवास्तव, श्रृजल कावड़े, दिव्या कठार और श्वेता श्रीवास्तव सहित विधि विभाग के विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी रही।
