खेसारी लाल यादव ने कहा कि अब उन्हें चिकन-मटन पसंद नहीं है और वे सिर्फ सादा व घर का बना खाना खाते हैं। उन्होंने गुड्डू रंगीला के घर रहने और संघर्ष के दिनों की यादें भी शेयर कीं।
भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार खेसारी लाल यादव अपनी दमदार गायकी और अभिनय के लिए जाने जाते हैं। हालांकि, हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने अपनी निजी जिंदगी से जुड़ी कई दिलचस्प बातें साझा कीं। इस दौरान उन्होंने अपने पसंदीदा खाने, खाना बनाने के शौक और संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कई खुलासे किए।
खेसारी लाल यादव ने बताया कि अब उनका नॉन-वेज खाने से लगभग पूरी तरह नाता टूट चुका है। एक समय चिकन और मटन खाने वाले खेसारी अब सादा और घर का बना भोजन ही पसंद करते हैं। उनका कहना है कि बदलती जीवनशैली और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपने खान-पान की आदतों में बड़ा बदलाव किया है।
सादा भोजन है पहली पसंद
एक इंटरव्यू में जब उनसे उनके पसंदीदा खाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मैं सादा और सिंपल खाना ज्यादा खाता हूं। अब चिकन-मटन से भी दूर-दूर तक रिश्ता नहीं है। पहले कभी-कभी खाने का मन करता था, लेकिन अब मन ही नहीं करता। उन्होंने आगे कहा कि उन्हें घर का खाना सबसे ज्यादा पसंद है और वह बाहर का खाना खाने से बचते हैं।
खाना बनाने में भी माहिर हैं खेसारी
खेसारी ने बताया कि मैं बाहर का कुछ भी नहीं खाता। अगर जरूरत पड़ी तो 24 घंटे भूखा रह सकता हूं, लेकिन रास्ते में कहीं भी कुछ खरीदकर नहीं खाता। खेसारी ने यह भी खुलासा किया कि उन्हें खाना बनाना अच्छी तरह आता है। उन्होंने बताया कि संघर्ष के दिनों में उन्होंने खुद खाना बनाना सीखा था। दाल, चावल, सब्जी जैसे पारंपरिक व्यंजन वह आसानी से बना लेते हैं।
गुड्डू रंगीला के घर बिताए संघर्ष के दिन
इंटरव्यू के दौरान खेसारी लाल यादव ने अपने संघर्ष के दिनों का एक दिलचस्प किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि साल 2005-06 के दौरान वह मुंबई में भोजपुरी गायक गुड्डू रंगीला के घर पर रहे थे। खेसारी ने कहा कि उस समय गुड्डू रंगीला के घर का नौकर चला गया था और उन्होंने खुद घर के कामों में मदद करने की जिम्मेदारी संभाली।
खेसारी लाल यादव की कहानी
उन्होंने बताया कि वह खुद को नौकर नहीं बल्कि छोटे भाई की तरह मानते थे। उनके अनुसार, उस समय बड़े कलाकार के साथ रहना और उनसे सीखना उनके लिए गर्व की बात थी। आज भोजपुरी इंडस्ट्री के सबसे बड़े सितारों में गिने जाने वाले खेसारी लाल यादव की यह कहानी उनके संघर्ष, सादगी और जमीन से जुड़े व्यक्तित्व को बखूबी दर्शाती है।
