नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (वार्ता) दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सोमवार को जलियांवाला बाग नरसंहार के 107वें स्मृति दिवस पर उन अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्यवाद की क्रूरता के सामने अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
इस अवसर पर श्री गुप्ता ने कहा कि वर्तमान दिल्ली विधानसभा भवन, जो उस समय इम्पीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल के नाम से जाना जाता था, इस स्वतंत्रता संग्राम की पीड़ा और प्रतिरोध का प्रत्यक्षदर्शी रहा है। अट्ठारह मार्च 1919 को इसी सभागार में भारतीय सदस्यों के तीव्र विरोध और कड़ी चेतावनियों को दरकिनार कर अंग्रेज़ सरकार ने काले कानून रॉलेट एक्ट को पारित कर दिया। इसी के विरोध में महात्मा गांधी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन का आह्वान किया।
श्री गुप्ता ने बताया कि इस आंदोलन की पहली चिंगारी दिल्ली की धरती पर ही भड़की। तीस मार्च 1919 को चाँदनी चौक के घंटाघर पर शांतिपूर्वक एकत्रित निहत्थे और मासूम नागरिकों पर अंग्रेज़ी हुकूमत ने मशीनगनों से गोलियाँ बरसाईं। यह दिल्ली के इतिहास का काला अध्याय है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली के इस घंटाघर नरसंहार की त्रासदी की पुनरावृत्ति मात्र चौदह दिन बाद 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियाँवाला बाग में हुई, जब जनरल डायर के आदेश पर सैकड़ों निर्दोष भारतीयों को गोलियों से भून दिया गया। वह भयानक घटना आज 107 वर्ष बाद भी प्रत्येक भारतीय के हृदय को गहरे दर्द से भर देती है और ब्रिटिश शासन की असली क्रूर प्रकृति को उजागर करती है।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि इन शहीदों का सर्वोच्च बलिदान व्यर्थ नहीं गया। उनके रक्त से स्वतंत्रता संग्राम की ज्वाला और प्रखर हुई और समूचा राष्ट्र एकजुट होकर आज़ादी के महायज्ञ में कूद पड़ा। उन्होंने कहा, “आज के दिन हमारा दायित्व है कि हम इन बलिदानियों की स्मृति को सदा जीवित रखें और उनके सपनों के भारत के निर्माण के लिए संकल्पबद्ध रहें।”
