बैतूल: नगर पालिका में निर्माण कार्यों में लंबे समय से चल रही कथित अनियमितताओं पर सख्ती शुरू कर दी गई है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी नवनीत पांडेय ने एक लाख रुपये से कम लागत के कार्यों की अनावश्यक फाइलें बनाने पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए हैं।नगर पालिका में प्रावधान है कि एक लाख रुपये से अधिक लागत के कार्य ई-टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से कराए जाएं, जिससे बाहरी ठेकेदारों को भी प्रतिस्पर्धा का अवसर मिले और कार्य कम लागत में बेहतर गुणवत्ता के साथ हो सके। इसके बावजूद कुछ मामलों में बड़े कार्यों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर बिना टेंडर के कराने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
सूत्रों के अनुसार ठेकेदारों द्वारा बड़े कार्यों को विभाजित कर एक-एक लाख रुपये से कम के प्रस्ताव तैयार कराए जाते थे, जिससे उन्हें बिना प्रतिस्पर्धा के कार्य मिल जाता था और पारदर्शिता प्रभावित होती थी। इस व्यवस्था के कारण निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समय-सीमा पर भी सवाल उठते रहे हैं।इसका असर आम नागरिकों पर भी पड़ता था, क्योंकि टुकड़ों में कार्य होने से परियोजनाएं लंबे समय तक अधूरी रहती थीं और लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ता था।
एक ही कार्य को कई हिस्सों में पूरा करने से समय और संसाधनों की भी बर्बादी होती थी।नई व्यवस्था के तहत सीएमओ ने निर्देश दिए हैं कि किसी भी कार्य को उसकी समग्रता में प्रस्तुत किया जाए और अनावश्यक रूप से विभाजित कर प्रस्ताव न भेजे जाएं। एक लाख रुपये से कम लागत के कार्यों की फाइलें केवल अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में ही बनाई जाएंगी।इसके साथ ही इंजीनियरों को स्थल निरीक्षण कर वास्तविक आवश्यकता का आकलन करने और संतुष्ट होने पर ही प्रस्ताव आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
सभी कार्यों में निर्धारित टेंडर प्रक्रिया का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।सीएमओ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि किसी भी शाखा द्वारा नियमों का उल्लंघन कर कार्यों को टुकड़ों में बांटने की कोशिश की गई, तो संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
