शहर की शांत फिजां में दहशतगर्दी की गूंज, सडक़ों पर चल रहीं गोलियां, खाकी गायब

जबलपुर: शहर की शांत फिजां में अपराधियों ने दहशतगर्दी फैला दी है। नागरिक खौफ के साये में है। सडक़ों में गोलियों की गूंज सुनाई दे रही है। डेढ़ माह के भीतर लगातार हुए गोलीकांड ने आम जनता की नींद उड़ा दी है। साथ ही सरेराह फायरिंग और बेखौफ घूमते बदमाशों ने पुलिस के सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है। बदमाश खुलेआम कट्टा और पिस्टल दिखाकर धमकाने के साथ गोलियां चला रहे है। पुलिस मामले में एफआईआर कर भूल जाती है कोई ठोस कदम नहीं उठाती है जिसके चलते गोलीकांड की वारदातों में लगातार इजाफा होता जा रहा है। हाल में शहर में हुई एक के बाद गोली चलने की वारदातों ने पुलिस की सक्रियता पर सवाल खड़े कर दिए है साथ ही सडक़ों पर अब खाकी डर और खौफ खत्म होता नजर आ रहा है।

जिसका मुख्य कारण पुलिस की गश्त सिर्फ मुख्य चौराहों तक सीमित रहना है। जिसके चलते तंग गलियां अपराधियों का सेफ जोन बनती जा रही है। पुलिस की गश्त, खाकी के सायरन की गूंज मुख्य मार्गों तक गूंज रहे है, मोहल्लों और तंग गलियों में पुलिस का नामोनिशां तक नहीं है। अधिकतर आदतन अपराधी रात के अंधेरे में वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। पुलिस की रात्रिकालीन गश्त दिखवा बनकर रह गई है। अफसरों से लेकर पुलिस के पेट्रोलिंग और मोबाइल वाहन पर तैनात अधिकारी और जवान रात 12 बजे तक तो सडक़ों पर नजर आते हैं, लेकिन इसके बाद पूरी गश्त दफ्तरों, वायरलेस सेट पर चलती है।
धराशायी खूफिया तंत्र, बीट सिस्टम चरमराया
शहर में बढ़ते अपराध का सबसे बड़ा कारण पुलिस के खूफिया तंत्र का कमजोर होना है। क्राइम पर नकेल कसने हर थाने में बीट सिस्टम लागू हुआ था। प्रत्येक थाने में दो से तीन बीट होती थी जिसमें एसआई या एएसआई स्तर के अधिकारी को प्रभार सौंपा जाता था । अपराधियों का डाटा अपडेट करने से लेकर उनकी जांच का जिम्मा भी दिया गया था लेकिन धीरे-धीरे अफसर इसे भूल गए और अब बीट सिस्टम पूरी तरह चरमरा गया है। मोहल्लों में कौन संदिग्ध रह रहा है, किसके पास अवैध हथियार हैं, कहां से हथियार पहुंच रहे है, बड़े सप्लायर कौन है, इसकी जानकारी जुटाने में पुलिस का तंत्र नाकाम साबित हो रहा है। इक्का दुक्का या छुटपुट अपराधियों को पुलिस पकडक़र अपनी पीट थपथपा रही है। यही वजह है कि अपराधी वारदात को अंजाम देकर बड़ी आसानी से रफूचक्कर हो जाते है।
अब सिर्फ चैकिंग प्वांइट, पैदल गश्त भूली पुलिस
अब सिर्फ चैकिंग प्वाइंट समय-समय पर लगते है पैदल गश्त पुलिस भूल चुकी है। जिसके चलते पुलिस की सक्रियता गलियों में कम हो गई है। पहले पुलिस रात में पैदल गश्त करती थी। गली मोहल्लों तक में पुलिस का दबदबा होता था लेकिन अब सिर्फ मुख्य मार्ग तक ही गश्त और पेट्रोलिंग हो रही है। पहले नागरिकों से सीधा थाना प्रभारियों का संपर्क होता था अब अधिकारी सिर्फ कार्यालयों में नजर आते है। सप्ताह में एक दिन जरूर दिखावे की गश्त हो रही है। अगर जल्द ही पुलिस ने अपनी कार्यप्रणाली नहीं बदली, तो अपराधियों को बेलगाम में अब देरी नहीं लगेगी।
शहर में पटाखों की तरह चल रही गोलियां
— 9 अप्रैल को बरेला अंतर्गत ग्राम परतला चौराहे पर रात 8:30 बजे स्कार्पियो सवार बदमाश नितिन मिश्रा ने मनीष पटेल पर फायर किया था। निशाना चूकने पर समीप खड़े कमलेश को गोली लग गई थी।

— 9 अप्रैल को शाम 7:30 बजे पाटन थाना अंतर्गत बेनीखेड़ा में जमीन विवाद में ठाकुर दास पटैल पर एक महिला ने मिर्ची झौंकी और इसके बाद उसके आधा दर्जन साथियों ने मारपीट कर उसे गोली मार दी।

— 9-10 अप्रैल की दरमियानी रात 12:45 बजे मदनमहल थाना अंतर्गत रानीपुर माली मोहल्ला में निर्माणाधीन मकान में घुसकर बदमाशों ने प्रॉपर्टी डीलर सचिन सैनी और उसके साथियों को धमकाया, पिस्टल से फायर किया ।

–3 अप्रैल को माढ़ोताल थाना अंतर्गत मरघटाई के पास रितिक जायसवाल ने अवैध पिस्टल को लहराते हुए हवाई फायरिंग की थी। वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल किया था।

— 31 मार्च को घमापुर थाना अंतर्गत कांचघर में गैंगवार हुआ । यश थोराट और लकी यादव के गुटों में टकराव हुआ । दोनों पक्षों ने गोलियां चलाई। काउंटर केस दर्ज किया गया।

—30 मार्च की रात 10:30 बजे माढ़ोताल थाना अंतर्गत निर्माणाधीन जबालीपुरम कॉलोनी में मोपेड सवार दो नकाबपोश बदमाशों ने फायरिंग करते हुए कॉलोनी में कॉलोनी में दहशतगर्दी फैलाई।

— 2 फरवरी को गढ़ा थाना अंतर्गत बेदी नगर छुई खदान में चौबीस घंटे के भीतर हत्या के मामले में जमानत पर छूटे कुख्यात बदमाश शिब्बू ने दो बार फायरिंग की थी

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