सारनी। सारनी पाथाखेड़ा क्षेत्र की कोयला खदानों में मजदूरों के साथ हो रहे कथित शोषण और अत्याचार ने अब जनचर्चा का रूप ले लिया है। चौक-चौराहों से लेकर सामाजिक मंचों तक इस मुद्दे पर तीखी बहस हो रही है, लेकिन प्रशासनिक कार्यवाही के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में कार्यरत श्रम अधिकारी आशीष गुप्ता पर मजदूरों और ठेकेदारों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि उनकी कार्यशैली के चलते मजदूरों का आंदोलन स्थगित तो हुआ, लेकिन जो सहमति बनी थी, उसका जमीनी स्तर पर कोई प्रभाव दिखाई नहीं दे रहा।
स्थिति यह है कि कई ठेका मजदूरों को न तो पूरा वेतन मिल पा रहा है और न ही उन्हें नियमित काम दिया जा रहा है। मजदूरों पर दोहरी मार पड़ रही है—एक ओर आर्थिक तंगी, दूसरी ओर रोजगार का संकट। करोड़ों रुपए के इस कथित घोटाले पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना प्रशासनिक निष्क्रियता को उजागर करता है।
मजदूरों का आरोप है कि वर्षों से ठेकेदार—आर.बी. मौर्या, एम.एस. दुबे, जे.के. साजिद खान, उस्मान और राजीव सूर्यवंशी—आज भी निर्धारित लगभग ₹1365 प्रतिदिन के स्थान पर ₹500-600 प्रतिदिन मजदूरी देने का दबाव बना कर मजदूरों से काम करवा रहे हैं।इसके साथ ही सुपरवाइजर नितेश, जमील ,मनीष, अंसारी ,रामराज नए मजदूरों को कम पैसा देकर कम करवा रहे हैं। कई ठेकेदारों ने बिना उचित प्रशिक्षण और सुरक्षा मानकों के खदानों में उतारा जा रहा है, जिससे उनकी जान जोखिम में पड़ रही है।
गंभीर बात यह भी सामने आई है कि बिना बीटीसी (ब्लास्टिंग ट्रेनिंग सर्टिफिकेट) और आवश्यक प्रमाणपत्रों के मजदूरों से बारूद ढुलवाने जैसे खतरनाक कार्य कराए जा रहे हैं। प्रबंधन द्वारा इन आरोपों से इनकार किए जाने के बावजूद, जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।इसके अलावा, कई ऐसे मजदूर जो मेडिकल रूप से फिट नहीं हैं, उन्हें भी काम पर लगाया जा रहा है, जबकि जो मजदूर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं, उन्हें द्वेषपूर्ण तरीके से काम से बाहर कर दिया गया है। व खदानों में उनकी फोटो लगाकर उन्हें काम से बेदखल कर दिया है इससे उनके परिवारों पर भी संकट गहरा गया है।स्थानीय प्रशासन—सीएसपीडीओपी प्रियंका करचाम, थाना प्रभारी जयपाल इवनाती और चौकी प्रभारी मनोज ऊईके—द्वारा कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन उसका असर ठेकेदारों नजर नहीं आ रहा।
अब आक्रोशित मजदूर जिला बैतूल के सांसद डीडी उईके और विधायक योगेश पंडाग्रे से मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाने जा रहे हैं। मजदूरों को उम्मीद है कि जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप से उन्हें न्याय मिलेगा और इस शोषण की श्रृंखला पर अंकुश लगेगा।
पाथाखेड़ा की खदानों में मजदूरों के साथ हो रहा यह कथित शोषण न केवल श्रम कानूनों की अवहेलना है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं पर भी गहरा आघात है। यदि समय रहते ठोस और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला और भी व्यापक जनआंदोलन का रूप ले सकता है।
