इस्लामाबाद | ईरान और अमेरिका के बीच हालिया युद्धविराम में मध्यस्थता के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर को नोबेल शांति पुरस्कार देने का प्रस्ताव पंजाब विधानसभा में पेश किया गया है। वर्तमान में पाकिस्तान के पास कुल 2 नोबेल पुरस्कार हैं, जिनमें से पहला 1979 में भौतिकी के लिए डॉ. अब्दुस सलाम को और दूसरा 2014 में मलाला यूसुफजई को शांति के लिए मिला था। डॉ. सलाम यह सम्मान पाने वाले पहले पाकिस्तानी थे, हालांकि अहमदिया समुदाय से होने के कारण उन्हें अपने ही देश में भारी उपेक्षा और विरोध का सामना करना पड़ा था। वहीं मलाला यूसुफजई ने महज 17 साल की उम्र में यह पुरस्कार जीतकर सबसे कम उम्र की विजेता बनने का गौरव हासिल किया।
भारत की बात करें तो अब तक 10 हस्तियों को नोबेल पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। इसकी शुरुआत 1913 में रवींद्रनाथ टैगोर (साहित्य) से हुई थी, जिसके बाद सीवी रमन, मदर टेरेसा, अमर्त्य सेन और कैलाश सत्यार्थी जैसे दिग्गजों ने विभिन्न श्रेणियों में भारत का मान बढ़ाया। वैश्विक स्तर पर अमेरिका 400 से अधिक पुरस्कारों के साथ शीर्ष पर काबिज है, जिसके बाद ब्रिटेन और जर्मनी का स्थान आता है। भारत को शांति के क्षेत्र में अब तक 2 नोबेल (मदर टेरेसा और कैलाश सत्यार्थी) मिले हैं। तुलनात्मक रूप से अमेरिका ने अकेले ही 27 से अधिक बार शांति का नोबेल जीतकर इस श्रेणी में भी अपना दबदबा बनाए रखा है।
दुनियाभर में अहिंसा के प्रतीक महात्मा गांधी को कभी नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिल पाना इतिहास की एक बड़ी विडंबना मानी जाती है। गांधीजी को 1937 से 1948 के बीच कुल 5 बार नामित किया गया था, लेकिन समिति के कुछ सदस्य उनके आंदोलनों को अंतरराष्ट्रीय शांति के बजाय ‘राष्ट्रवादी’ और ‘राजनीतिक’ मानते थे। 1948 में उन्हें यह सम्मान मिलने की प्रबल संभावना थी, लेकिन उनकी हत्या के कारण तकनीकी पेंच फंस गया। उस समय मरणोपरांत पुरस्कार देने का नियम नहीं था और पुरस्कार राशि के उत्तराधिकारी को लेकर भी स्पष्टता नहीं थी। इसके सम्मान स्वरूप नोबेल समिति ने 1948 में किसी को भी शांति पुरस्कार नहीं दिया और यह स्वीकार किया कि उस वर्ष कोई भी जीवित उम्मीदवार गांधीजी के कद के बराबर नहीं था।

