
छिंदवाड़ा। जिले में उर्वरक वितरण व्यवस्था को पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में सेवा सहकारी समितियों, मार्केटिंग समितियों के प्रबंधकों एवं थोक उर्वरक विक्रेताओं का ई-विकास प्रणाली पोर्टल संबंधी प्रशिक्षण आयोजित किया गया। बैठक में कलेक्टर हरेन्द्र नारायन द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए कि शासन के निर्देशानुसार 1 अप्रैल 2026 से प्रदेश में उर्वरकों का शत-प्रतिशत वितरण ई-विकास प्रणाली के माध्यम से ही किया जाना अनिवार्य है। उन्होंने सभी समिति प्रबंधकों को निर्देशित किया कि उर्वरक का विक्रय केवल ई-विकास पोर्टल एवं पीओएस मशीन के माध्यम से ही किया जाए। किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध सख्त कार्यवाही की जाएगी। कलेक्टर श्री नारायन ने बताया कि शासन स्तर से उर्वरक वितरण की प्रतिदिन मॉनिटरिंग की जा रही है। यदि ई-विकास प्रणाली एवं पीओएस मशीन के माध्यम से किए गए विक्रय में अंतर पाया जाता है, तो इसे गंभीरता से लेते हुए कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। बैठक में कलेक्टर ने यह भी निर्देशित किया गया कि शासन के निर्देशानुसार सेवा सहकारी समितियों, मार्कफेड गोदाम एवं निजी विक्रय केन्द्रों द्वारा उर्वरक उठाव के लिए कृषकों का पंजीयन पूर्णत: नि:शुल्क किया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक किसान इस प्रणाली से जुड़ सकें और उन्हें समय पर उर्वरक उपलब्ध हो सके।
समिति प्रबंधकों की शंकाओं का किया समाधान ००००
प्रशिक्षण के दौरान उप संचालक कृषि जितेंद्र कुमार सिंह ने ई-विकास प्रणाली के संशोधित प्रावधानों की विस्तृत जानकारी देते हुए समिति प्रबंधकों की शंकाओं का समाधान किया। उन्होंने निर्देश दिए कि पोर्टल संचालन में किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्या आने पर लिखित रूप में अवगत कराएं, ताकि समय पर निराकरण किया जा सके।
सत्यापन के बाद की जाएगी कार्यवाही ००००००
उप संचालक कृषि जितेन्द्र कुमार सिंह ने यह भी बताया कि गोदाम में उपलब्ध उर्वरक स्टॉक एवं पीओएस मशीन में दर्ज स्टॉक में किसी प्रकार का अंतर पाए जाने पर सत्यापन उपरांत आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। साथ ही किसानों को ई-विकास प्रणाली के माध्यम से ई-टोकन बुकिंग में आने वाली समस्याओं के समाधान हेतु कृषि, सहकारिता, राजस्व एवं पंचायत विभाग के अधिकारियों तथा निजी विक्रेताओं से सहयोग लेने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
