सिर्फ जुर्माने से नहीं रुक सकता डीजे की तेज आवाज से मौत का सिलसिला

जबलपुर। ध्वनि प्रदूषण के कारण बढ़ती बीमारियों तथा डीजे के तेज आवाज से लोगों को हार्ट अटैक आने तथा ब्लड प्रेशर बढ़ने को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गयी थी। याचिका में कहा गया था कि डीजे की तेज आवाज के कारण हाई अटैक से कई मौत भी हुई हैं। सरकार की तरफ से पेश जवाब में कहा गया कि डीजे की तेज आवाज से लोग के स्वास्थ पर विपरीत असर पडता है। सरकार के द्वारा निर्धारित से अधिक तेज आवाज में डीजे बजाने वालों के खिलाफ कार्यवाही की जाती है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए इसे गंभीर समस्या मानते हुए इसके लिए लोग को जागरूक होने की बात की।

नाना देशमुख वेटनरी यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति गोविंद प्रसाद मिश्रा उम्र 83 साल, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी आर पी श्रीवास्तव उम्र 100 सहित अन्य चार की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि शादियों व धार्मिक आयोजन के दौरान बहुत तेज आवाज में डीजे बजाये जाते है। मानव शरीर 75 डेसिबल आवाज की तीव्रता सहन कर सकता है। इससे अधिक आवाज ध्वनि प्रदूषण की श्रेणी में आते है। डीजे की तीव्रता 100 डेसिबल से अधिक होती है। जिसके कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पडता है। डीजे की तेज आवाज के कारण लोगों को हार्ट अटैक आते या उनका ब्लड प्रेशर बढ जाता है। इसके अलावा तेज आवाज के कारण लोग बहरे हो रहे है। तेज आवाज में डीजे से बचने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पडता है। याचिका में शहर की मॉडल रोड में अवैध पार्किंग का मामला भी उठाया गया था। याचिका में कहा गया था कि इस सड़क का नामकरण इस उद्देश्य के साथ किया गया था कि यह शहर की आदर्श रोड बने। इसके विपरीत सडक टैक्सी व ऑटो के लिए अवैध पार्किंग स्थल बन गया है।

सरकार की तरफ से पेश जवाब में इसे समस्या मानते हुए बताया गया कि तेज आवाज में डीजे बचाने पर कोलाहल एक्ट के तहत जुर्माना कार्यवाही की गयी है। याचिकाकर्ताओं की तरफ से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखते हुए युगलपीठ को बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी ध्वनि प्रदूषण को गंभीर समस्या माना है। जिसका विपरीत असर मानव जीवन पर पड रहा है और वह बीमारियों का शिकार हो रहे है। डीजे की तेज आवाज के कारण हार्ट अटैक आने के कारण कई व्यक्ति की मौत भी हुई है। सिर्फ जुर्माने की कार्यवाही से इसे नहीं रोका जा सकता है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद उक्त टिप्पणी करते हुए अगली सुनवाई 23 जून को निर्धारित की है।

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