कब्र से शव निकालकर करवाया जाये पोस्टमार्टम: हाईकोर्ट 

जबलपुर। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस ए के सिंह की युगलपीठ दायर अपील सुनवाई करते हुए कब्र से शव निकालकर पोस्टमार्टम कराये जाने के आदेश जारी किये है। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ता सुबह 11 बजे एसडीएम अधारताल के समक्ष उपस्थित हो और दोपहर 1 बजे तक शव को कब्र से बाहर निकलने के बाद उसे जबलपुर मेडिकल कॉलेज पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया जाये। याचिकाकर्ता निर्धारित समय पर एसडीएम के समक्ष उपस्थित नहीं होता है तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जायेगी।

जबलपुर निवासी कसीमुद्दीन कुरैशी की तरफ से दायर की गयी अपील में कहा गया था कि उसका भाई गयासुद्दीन कुरैशी नरसिंहपुर जिले के बोरीपार गांव में रहता था। उसका भाई 26 मार्च 2025 एक हादसे का शिकार हो गया, जिसके बाद उसे गंभीर हालत में जबलपुर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद अगले दिन 27 मार्च को इलाज के लिए नागपुर ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। जबलपुर स्थित अस्पताल की डिस्चार्ज रिपोर्ट में उसके भाई के सीने में चोट का निशान बताये गये थे। ऐसे में मौत को सामान्य नहीं माना जा सकता।

याचिकाकर्ता ने पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर मामले की जांच और पुनः पोस्टमार्टम करवाये जाने की मांग की गयी थी। आवेदन पर कोई कार्यवाही नहीं होने के कारण उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। एकलपीठ ने उक्त याचिका खारिज करते हुए अपने आदेश में कहा था कि मृतक को 27 मार्च 2025 को दफनाया गया था। रिकॉर्ड में कोई सबूत नहीं है कि शुरुआती पोस्टमॉर्टम और प्रक्रिया में किसी गलत इरादे से कमी की गयी है और कानूनी नियमों का उल्लंघन करके किया गया था। हॉस्पिटल डिस्चार्ज समरी में लिखी चोट का सिर्फ जिक्र होना होमीसाइडल मौत या पोस्टमार्टम की प्रक्रिया को गलत मानते हुए पुनः पोस्टमॉर्टम का आधार नहीं है। जिसके कारण उक्त अपील दायर की गयी है।

पिछली सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से पेश किये गये जवाब में बताया गया कि एसएचओ थाना स्टेशन गंज जिला नरसिंहपुर द्वारा प्रारंभिक जांच की गयी थी। जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए युगलपीठ को बताया गया कि सभी संबंधित व्यक्ति के बयान दर्ज किये गये और प्रकरण एफआईआर दर्ज करने योग्य नहीं है। युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान सरकारी अधिवक्ता से पूछा कि कानून के किन नियमों के तहत जांच कार्यवाही की गयी। सरकारी अधिवक्ता की तरफ से बताया गया कि हाईकोर्ट की एकलपीठ द्वारा पारित आदेश तथा नरसिंहपुर पुलिस अधीक्षक के द्वारा 11 नवंबर 2025 को जारी आदेश के अनुसार जांच की गयी थी। युगलपीठ ने हैरानी जताते हुए अपने आदेश में कहा था कि शिकायत संज्ञेय अपराध को दर्ज करने के लिए की गयी थी। बिना एफआईआर दर्ज किये पुलिस कैसे जांच कर सकती है। पुलिस अधीक्षक व न्यायालय बिना एफआईआर दर्ज किये बिना कैसे जांच के आदेश जारी कर सकता है। ऐसा लगता है कि पुलिस विभाग कानून में दिये गये प्रावधान तथा सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर ध्यान नही दे रहा है। युगलपीठ ने इस संबंध में कि नरसिंहपुर पुलिस अधीक्षक को व्यक्तिगत रूप से हलफनामा पेश करने के आदेश जारी किये थे। याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने उक्त आदेश जारी किये। युगलपीठ ने इस प्रक्रिया में मृतक की पत्नी तथा पुत्र को शामिल होने की अनुमति प्रदान की है।

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