मालवा- निमाड़ की डायरी
संजय व्यास
लोकसभा चुनाव 2024 में 0-29 से हार के बाद हुई कांग्रेस की किरकिरी से नाराज राहुल गांधी का गुस्सा प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी पर फूटा था. इसके उपरांत राहुल गांधी के महू में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पटवारी ने इसके लिए माफी मांगने के साथ कांग्रेस को प्रदेश में मजबूत करने का वचन दिया था. अब कुछ माह में होने वाले राज्य सभा चुनाव पटवारी की परीक्षा की घड़ी होंगे. आगामी जून तक रिक्त हो रही 3 सीटों के लिए चुनाव होंगे. विधायकों के समीकरण के हिसाब से कांग्रेस को एक सीट मिलना है. उसके लिए भी जीतू पटवारी के समक्ष चुनौतियां खड़ी हैं.
उन्हें मनोबल बढ़ाने वाले साथियों की आवश्यकता है, परंतु हाल के कुछ बयानों के कारण उन्हें विकट स्थिति का सामना करना पड़ रहा है. विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और प्रदेश कांग्रेस महासचिव राकेश सिंह यादव के सार्वजनिक रूप से दिए बयान कि राज्य सभा चुनाव में पार्टी के कुछ विधायकों के क्रास वोटिंग की आशंका है, इसने कांग्रेस का ही मनोबल तोडऩे का काम किया है. ऐसी बातें गोपनीयता के साथ पार्टी नेतृत्व को बताई जाती हैं, ताकि कमजोर कड़ी को रणनीतिक रूप से थाम ले.
मगर ऐसा न होना किसी भी राजनेता की अपरिपक्वता की निशानी है. सिंघार और राकेश सिंह को इस तरह की कोई भी पार्टी की कमजोरी को रणनीतिक तौर पर वरिष्ठों से सुधरवाने की दिशा में कदम बढ़ाना था, लेकिन उन्होंने खुलेआम इस कमजोरी को विपक्षी पार्टी के सामने ला दिया, जिसका वह फायदा उठा सकती है. फिलहाल इस स्थिति ने चुनाव जीतने की तैयारी में लगे जीतू पटवारी को चिंता में डाल दिया है. वैसे ही 65 विधायकों की पार्टी में न्यायालयीन आदेश से एक विधायक का वोटिंग अधिकार अटक गया, वहीं एक की सजा होने से विधायकी समाप्त हो गई और कुछ डावांडोल हैं
कलेक्टर ने विधायक को क्यों इंतजार करवाया?
रतलाम कलेक्ट्रेट में विगत चार माह से धरना, प्रदर्शन, नारेबाजी, एकत्रीकरण पर प्रतिबंध लगा हुआ है. इसके बाद भी आलोट के भाजपा विधायक व पूर्व सांसद चिंतामणि मालवीय उज्जैन से जावरा तक बन रहे ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे के मुआवजे के संबंध में किसानों की समस्या को लेकर ग्रामीणों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंच गए. प्रतिबंधित क्षेत्र में बगैर कोई सूचना, अनुमति के उनके लवाजमे के साथ आने पर कलेक्टर मिशा सिंह उखड़ गईं. विधायक के बोर्ड छोडक़र बाहर आने के बुलावे को उन्होंने नजर अंदाज कर दिया. काफी इंतजार के बाद आखिर विधायक मालवीय ने ग्रामीणों को लेकर वहीं सीढिय़ों पर धरना दे दिया. इस हालात में आधे घंटे उपरांत कलेक्टर बाहर आईं और विधायक की बात सुनीं. किसानों ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि अधिग्रहित जमीन का उन्हें प्रस्तावित ढाई लाख रुपए प्रति बीघा मुआवजा दिया जा रहा है, जो वर्तमान बाजार दर की तुलना में बहुत कम है. किसानों ने मांग की कि जमीन का उचित मूल्य बाजार भाव के अनुसार तय किया जाए. इस पर कलेक्टर के मुआवजे की पुनर्समीक्षा करवाने के आश्वासन पर वे लौट गए, उधर इंतजार करवाने की बात पर प्रशासन की ओर से सफाई दी गई कि उन्हें कलेक्टर कक्ष में चर्चा के लिए बुलाया गया, लेकिन विधायक ने ही यह कहते हुए मना कर दिया कि मामला जनता से जुड़ा है, इसलिए बातचीत भी खुले में और सभी के सामने ही होनी चाहिए.
खंड़वा ब्लॉक के ‘हाथ’ में ‘भगवा’ कमान
खंडवा जिला कांग्रेस संगठन में हाल ही में हुई नियुक्तियों से कार्यकर्ताओं में आक्रोश व्याप्त है. संगठन विस्तार के नाम पर जारी की गई लिस्ट में रणनीतिक चूकें सामने आई हैं, जिनसे पार्टी की साख दांव पर लग गई है. कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पद बांटने में निष्ठा से ज्यादा ‘नजदीकियों’ और ‘बाहरी’ रसूख का ध्यान रखा गया है. आलम यह है कि कांग्रेस की इस नई फौज में भाजपा समर्थकों तक को जगह मिल गई है, जिससे समर्पित कार्यकर्ता बिफर गए हैं. भाजपा समर्थक की नियुक्ति का मामला ब्लाक से जुड़ा है. आरोप है कि जिस व्यक्ति को संगठन की मजबूती के लिए ब्लॉक अध्यक्ष की कमान सौंपी गई है, वह खुलेआम भाजपा की विचारधारा और उनके कार्यक्रमों का समर्थन करता रहा है. निष्ठावान कांग्रेसियों का सवाल है कि क्या पार्टी के पास अब समर्पित कार्यकर्ताओं का अकाल पड़ गया है जो ‘भगवा’ रंग में रंगे चेहरों को ‘हाथ’ का साथ दिया जा रहा है
