
खण्डवा। जनजातीय कार्य विभाग में व्याप्त अनियमितताओं के खिलाफ जिला प्रशासन ने के आदेशों ने पूरे महकमे में खलबली मचा दी है। एक ओर जहाँ भ्रष्टाचार की जांच की जद में आए छात्रावास अधीक्षक को निलंबित कर मुख्यालय से दूर फेंक दिया गया है, वहीं दूसरी ओर नियमों को ताक पर रखकर किए गए दर्जनों तबादलों को कलेक्टर के निर्देश पर तत्काल प्रभाव से शून्य घोषित कर दिया गया है। प्रशासन की इस कार्रवाई का केंद्र तत्कालीन सहायक आयुक्त संतोष शुक्ला के कार्यकाल की वह कार्यप्रणाली है, जो अब जांच दल के निशाने पर है। भ्रष्टाचार की शिकायतों की उच्चस्तरीय जांच को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए जनजातीय सीनियर बालक छात्रावास के अधीक्षक हेमंत सिन्हा को पद से पृथक कर दिया गया है। प्राथमिक शिक्षक के मूल पद वाले सिन्हा की भूमिका जांच के दौरान संदिग्ध पाई गई थी, जिसके चलते उन्हें निलंबित कर उनका मुख्यालय विकासखण्ड कार्यालय खालवा नियत किया गया है।
अभी विभाग इस निलंबन की गूंज से संभला भी नहीं था कि कलेक्टर कार्यालय ने मार्च में हुए सभी स्थानांतरण और संलग्नीकरण (अटैचमेंट) आदेशों को रद्द कर दूसरा बड़ा झटका दे दिया। प्रभारी सहायक आयुक्त बजरंग बहादुर सिंह द्वारा जारी आदेश के अनुसार तमाम आदेश सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन के बिना ही जारी कर दिए गए थे, जो कि सीधे तौर पर नियम विरुद्ध थे। इस ‘क्लीन स्वीप’ के बाद उन सभी कर्मचारियों को वापस अपने पुराने कार्यस्थलों पर लौटना होगा जिन्होंने बैकडोर एंट्री के जरिए मनचाही पोस्टिंग पाई थी।
