रीवा: मप्र हाईकोर्ट ने अपने एक अहम आदेश में कहा है कि किसी भी संस्था को बिना सुनवाई का अवसर दिए ब्लैकलिस्ट नहीं किया जा सकता। जस्टिस एसएन भट्ट की एकलपीठ ने उक्त मत के साथ रीवा कलेक्टर का वह आदेश निरस्त कर दिया है, जिसमें एक सहकारी समिति को ब्लैक लिस्ट किया गया था। न्यायालय ने मामले में स्पष्ट किया है कि पहले याचिकाकर्ता को शोकॉज नोटिस दिया जाए। फिर उसे अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए। इसके बाद ही कोई भी कार्रवाई की जाए।
दरअसल यह मामला रघुराजनगर तहसील स्थित सेवा सहकारी समिति के मैनेजर सतीश पांडे की ओर से दायर किया गया है। जिसमें कहा गया कि धान खरीदी में कथित गड़बड़ी के आरोप में कलेक्टर ने बिना सुनवाई के ही समिति को ब्लैकलिस्ट कर दिया। इससे समिति को आगामी अनाज खरीदी प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। आवेदक की ओर से तर्क दिया कि धान खरीदी से होने वाली आय ही समिति सदस्यों की मुख्य आजीविका है।
अब ब्लैकलिस्टिंग की एक तरफा कार्रवाई के बाद सदस्यों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जायेगा। बिना सुनवाई का मौका दिए की गई यह कार्रवाई अवैधानिक और मनमानी है। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने माना कि 6 नवंबर 2025 के ब्लैकलिस्टिंग के आदेश से पहले याचिकाकर्ता को न तो कोई कारण बताओ नोटिस दिया गया और न ही सुनवाई का अवसर प्रदान किया गया। इसे गंभीर त्रुटि मानते हुए हाईकोर्ट ने रीवा कलेक्टर का आदेश निरस्त कर दिया।
