सतना: शहर के निजी अस्पताल में गलतफहमी पर जमकर हंगाम हुआ। अब ये हंगामा गलतफहमी का ही रहा या फिर किसी का उकसाया हुआ था यह तो जांच में सामने आएगा पर अस्पताल में हंगामा करने वालों ने तमाम तरह के आरोप डॉक्टर से लेकर प्रबंधन व उपचार को लेकर लगाए ,अस्पताल के इंमरजेंसी गेट पर घंटो ड्रामेबाजी चली ,पुलिस पहुंची नेतागिरी भी हुई ,धोखाधड़ी से लेकर न्याय-अन्याय की बाते हुईं पर जैसे ही तकरीबन पौने दो लाख के ऊपर की रकम भरा चेक मिला आरोप बेदम होगए ,नेताओ की रवानगी हो गई,।
जबकि उसके पहले आरोप थे कि ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन किया तो पेट में चीरा क्यों लगाया कही किडनी निकाल ली क्या। चिकित्सक एवं अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगा परिसर में प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। सूचना मिली तो कोलगवां पुलिस टीआई सहित मौके पर पहुंच गए। दरअसल सभापुर थाना क्षेत्र के ग्राम माजन निवासी 60 वर्षीय जमुनिया साकेत को 29 मार्च को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच के बाद डॉक्टरों ने ब्रेन ट्यूमर की पुष्टि की थी जिसके बाद 1 अप्रैल को ऑपरेशन किया गया था।
बिना होश आए कर दी छुट्टी करने के आरोप,फिर बढ़ा हंगामा
परिजनो के आरोपों के मुताबिक ऑपरेशन के बाद महिला को होश तक नहीं आया, बावजूद इसके शुक्रवार की सुबह अस्पताल ने मरीज की छुट्टी कर दी। घर पहुंचने के बाद जब परिजन ने पट्टियां हटाईं, तो मरीज के पेट पर भी सर्जरी जैसा गहरा चीरा दिखाई दिया। इसे गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही मानते हुए मरीज को लेकर अस्पताल पहुंच गए। आरोप हैं कि जब परिजन ने अस्पताल प्रबंधन को जानकारी देने का प्रयास किया तो प्रबंधन ने डॉक्टर के छुट्टी में होने का हवाला देते हुए मरीज को एडमिट करने से इंकार कर दिया। अस्पताल प्रबंधन को द्वारा जब मरीज को अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया तो वह परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हो गए।
उन्होंने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर गलत इलाज और लापरवाही के आरोप लगाते हुए अस्पताल में विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। अस्पताल स्टाफ और सुरक्षाकर्मियो ने मरीज के परिजन और ग्रामीणों को अस्पताल परिसर में हंगामा करने से रोका लेकिन जब परिजन न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन करना बंद नहीं किया तो प्रबंधन ने बल का प्रयोग करते हुए परिजन से मारपीट करते हुए अभद्र व्यावहार किया। जिसके बाद स्थित और गंभीर हो गयी। सूचना पर थाना प्रभारी सुदीप सोनी पुलिस बल के साथ मौके में पहुंच गए। इस दौरान अतिरिक्त बल के तौर कोतवाली प्रभारी राविंद्र द्विवेदी अपनी टीम के साथ अस्पताल पहुंच गए। पुलिस द्वारा पीडि़त परिवार को समझाइस दी गई लेकिन वह अस्पताल प्रबंधन पर गलत उपचार और सुरक्षाकर्मियों पर मारपीट का आरोप लगाते कार्यवाही की मांग पर अड़े हुए थे।
राशि मिलने के बाद समाप्त हुआ प्रदर्शन
तकरीबन तीन घंटे तक चले प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने पीडि़त परिवार से घटना के संदर्भ में पूरी जानकारी ली। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने अस्पताल के प्रबंधन से बात की। पुलिस हस्ताक्षेप के बाद अस्पताल प्रबंधन मरीज के ईलाज में खर्च आयी राशि को वापस करने के राजी हुआ। प्रबंधन द्वारा चेक के जरिए मरीज के परिजन को तकरीबन 1 लाख 87 हजार रुपए वापस दी तो परिजन प्रदर्शन समाप्त किए।
पेट की आंतों के बीच रखी जाती है हड्डी,छवि खराब करने साजिश
अस्पताल के पीआरओ हरिशंकर मिश्रा ने बताया कि यह एक चिकित्सा पद्धति है। ब्रेन ट्यूमर के ऑपरेशन के दौरान ब्रेन की हड्डी निकाल कर पेट की आंतों के बीच रखी जाती है। मरीज जब रिकवर हो जाता है तब वापस वो हड्डी ब्रेन में लगा दी जाती है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि यह हड्डी जीवित रह सके और संक्रमण से बची रहे। पीआरओ हरिशंकर मिश्रा ने आरोप लगाया कि मरीज के परिजन इलाज में खर्च वापस लेने के लिए ये हंगामा कर रहे थे और खर्च मिलने के बाद वापस चले गए।
उन्होंने बताया कि मरीज का ऑपरेशन न्यूरोसर्जन डॉ निशांत श्रीवास्तव ने किया था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने मरीज के परिजन से घटना के संबंध में लिखित जानकारी मांगी है। इधर अस्पताल प्रबंधन द्वारा भी अस्पताल में पर लगाए आरोपों को फर्जी बताया गया है। पीआरओ श्री मिश्रा का कहना है मरीज के परिजन अस्पताल में गलत इलाज का आरोप लगाकर अस्पताल की छवि खराब करने का काम किया है जबकि यह एक चिकित्सा पद्धति है। जिसकी शिकायत कोलगवां थाना में दर्ज करायी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस प्रदर्शन में मरीज के परिजन समेत कांग्रेस नेता रीतेश त्रिपाठी, विजय सिंह सहित अन्य शामिल है जिनके विरुद्ध कोलगवां थाना में शिकायत दर्ज करायी जाएगी
