सतना:किसानों को उर्वरक वितरण में पारदर्शिता, समयबद्धता और सुगमता सुनिश्चित करने के लिए जिले में लागू ई-विकास प्रणाली के उल्लंघन पर प्रशासन ने सख्त कार्यवाही की है। कलेक्टर सतना डॉ. सतीश कुमार एस के निर्देशन में 1 अप्रैल 2026 से उर्वरकों का शत-प्रतिशत वितरण ई-विकास प्रणाली के माध्यम से किया जाना अनिवार्य किया गया है। इसके बावजूद 3 अप्रैल को जिले के 6 उर्वरक विक्रेताओं द्वारा बिना ई-विकास प्रणाली के किसानों को उर्वरक बेचने का मामला सामने आया।
आईएफएमएस पोर्टल से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार मे. गुप्ता खाद भण्डार बेला रामपुर बाघेलान, मे. जय कामतानाथ कृषि एवं खाद बीज भण्डार बर्रेह बड़ा अमरपाटन मैहर, मे. कुशवाहा कृषि सेवा केन्द्र बस स्टैण्ड ग्राम सलैया मैहर, मे. सावित्री एग्रो गोरइया रामपुर बाघेलान, मे. किशन खाद एजेंसी कोलगवां सोहावल, मे. चतुर्वेदी एग्रीकल्चर सरिसताल बाबूपुर सोहावल द्वारा बिना ई-विकास प्रणाली के उर्वरकों का विक्रय कृषकों को किया गया है। इसे उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 का उल्लंघन मानते हुए उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास सतना आशीष पाण्डेय द्वारा संबंधित संस्थाओं के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं।
निलंबन अवधि के दौरान इन प्रतिष्ठानों द्वारा किसी भी प्रकार का क्रय-विक्रय पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर वैधानिक कार्यवाही की जाएगी। साथ ही अन्य सभी उर्वरक विक्रेताओं को चेतावनी दी गई है कि बिना ई-विकास प्रणाली के उर्वरक बिक्री करने पर उनके खिलाफ भी इसी प्रकार की कार्यवाही होगी। सभी विक्रेताओं से केवल ई-विकास प्रणाली के माध्यम से ही उर्वरक बेचने तथा खुली बोरी से बिक्री न करने की अपील की है। किसानों से भी आग्रह किया गया है कि वे ई-विकास प्रणाली के जरिए टोकन बुक कर ही उर्वरक खरीदें, जिससे उन्हें समय पर और पारदर्शी तरीके से खाद उपलब्ध हो सके
