जबलपुर: जनगणना चार्ज अधिकारी संभाग क्रमांक 4 गोरखपुर नगर निगम के द्वारा जारी किया आदेश इन दिनों नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल के लैब टैक्रीशियनों को हजम नहीं हो रहा है जिसका अब विरोध भी होने लगा है। नगर निगम संभागीय अधिकारी द्वारा जारी आदेश के मुताबिक जनगणना 2027 का काम मेडिकल के बाबू नहीं बल्कि मरीजों के खून, पेशाब व अन्य जांच करने वाले कर्मचारी करेंगे। ये पहला मौका होगा कि बाबुओं की जगह लैब टैक्रीशियनों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके पहले बाबुओं की ही ड्यूटी जनगणना में लगाई जाती रही है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल की लैब में करीब 45 कर्मचारी हैं जिनमें से करीब 30 की एक साथ जनगणना में ड्यूटी लगाने के आदेश नगर निगम द्वारा जारी किए गए हैं।
खबर तो ये भी है कि नगर निगम के संभागीय अधिकारी ने मेडिकल डीन से चर्चा किए बगैर तुगलकी फरमान जारी किया है।जानकारी के अनुसार मेडिकल कॉलेज अस्पताल में करीब 150 बाबू कार्यरत हैं। जिनमें से एक बाबू की भी जनगणना में ड्यूटी नहीं लगाई गई है। इसके पहले भी जनगणना काम मेडिकल के बाबू ही करते आए हैं लेकिन इस बार बाबुओं को ड्यूटी से दूर रखने के आदेश को सभी हजम नहीं कर पा रहे हैं। वहीं मेडिकल के लैब के कर्मचारियों का कहना है कि यदि आदेश का पालन करते हैं तो मेडिकल में मरीजों की जांच का काम पूरी तरह से ठप्प हो जाएगा। सवाल ये खड़े हो रहे हैं कि क्या इस आदेश को संशोधित किया जाएगा या फिर मरीजों के स्वास्थ्य की रिस्क नगर निगम और मेडिकल प्रबंधन द्वारा ली जाएगी।
ये लिखा है आदेश में…
आदेश में स्पष्ट लिखा है कि जनगणना 2027 के प्रथम चरण का कार्य 1 मई 2026 से 30 मई 2026 तक एवं द्वितीय चरण 2027 तक संपन्न होना है जिसके लिए लोकसेवकों, कर्मचारियों को नियुक्ति किया जाता है।
चिकित्सा शिक्षा कर्मचारी संघ करेगा विरोध
मप्र लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र तिवारी ने नवभारत को बताया कि नगर निगम के इस आदेश का विरोध किया जाएगा और मांग की जाएगी कि लैब टैक्रीशियनों की जगह मेडिकल के बाबुओं की ड्यूटी जनगणना में लगाई जाए। उन्होंने ये भी बताया कि अभी नगर निगम से जो आदेश जारी हुए हैं उसके मुताबिक खून, पेशाब की जांच करने वाले करीब 30 कर्मचारियों को जनगणना का कार्य सौंपा गया है जो कि गलत है। ऐसे में अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाएं प्रभावित होंगी ।
