बसों में बायीं ओर दो दरवाजे और एक अतिरिक्त आपात कालीन द्वार हों : हाईकोर्ट 

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण जबलपुर को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि सभी स्टेज कैरिज और पर्यटक बसें मोटर वाहन नियम मध्य प्रदेश के नियम 164 का अनुपालन करें। न्यायालय ने सुरक्षा मानदंडों का अनुपालन न किए जाने पर कहा कि यह बहुत ही खेदजनक स्थिति है कि कई वातानुकूलित बसों और यहां तक कि गैर-वातानुकूलित लक्जरी बसों और स्लीपर बसों में बायीं ओर दो दरवाजे और एक अतिरिक्त आपातकालीन द्वार नहीं है। लक्जरी बसों से जुड़ी आग दुर्घटनाओं में बड़ी संख्या में जान-माल की हानि हो रही है। तकरीबन किसी भी वाहन पर बायीं ओर दो द्वार सुनिश्चित नहीं किए गए हैं और परमिट अंधाधुंध जारी किए जा रहे हैं। कोर्ट ने आरटीओ को यह जांच करने का निर्देश दिया कि क्या किसी भी स्टेज कैरिज और पर्यटक बसों द्वारा नियम 164 का उल्लंघन किया जा रहा है। यदि कोई बसें उल्लंघन करती पाई गईं, तो उनका संचालन 45 दिनों के भीतर बंद कर दिया जाए। कोर्ट ने परिवहन विभाग के मुख्य-अतिरिक्त सचिव को इस संबंध में उठाए गए कदमों की जानकारी शपथपत्र में पेश करने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को नियत की है।

दरअसल मंडला निवासी बस आपरेटर राम मिलन राय की ओर से दायर याचिका में राज्य परिवहन अपीलीय न्यायाधिकरण (एसटीएटी) के एक आदेश को चुनौती दी गई थी। इस आदेश में एक प्रतिद्वंद्वी आपरेटर (प्रतिवादी नंबर-दो) द्वारा दायर संशोधन की अनुमति दी थी और याचिकाकर्ता के परमिट को निरस्त कर दिया था। तर्क दिया गया नंबर-दो प्रतिद्वंद्वी रूट आपरेटर नहीं था और उसके पास परमिट देने पर आपत्ति करने का कोई अधिकार नहीं था। सुनवाई में कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता की बस में कुल मिलाकर केवल 36 सीटें थीं, जो निर्धारित आवश्यकता से कम थीं। कोर्ट ने कहा कि नियम 164 के तहत प्रत्येक गाड़ी में बायीं ओर कम से कम दो दरवाजे होने चाहिए, एक प्रवेश के लिए और एक निकास के लिए और दाईं या पिछली तरफ एक आपातकालीन दरवाजा होना चाहिए। जबकि वर्तमान मामले में, बस में केवल एक प्रवेश द्वार और एक आपातकालीन द्वार था। कोर्ट ने कहा कि अधिकार क्षेत्र का प्रश्न निर्णायक नहीं है क्योंकि वैधानिक गैर-अनुपालन पर परमिट रद्द करना उचित है।

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