नियुक्ति से तीन साल पूर्व हुए सीमांकन के मामले में महिला पटवारी को बनाया आरोपी

जबलपुर। महिला पटवारी ने नियुक्ति से तीन साल पूर्व हुए सीमांकन में मामले में आरोपी बनाए जाने को हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी गयी थी। हाईकोर्ट जस्टिस बी पी षर्मा एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि नियुक्ति के के तीन साल पूर्व हुई घटना में महिला पटवारी को आरोपी बनाया जाना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। एकलपीठ ने महिला पटवारी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने के आदेश जारी किये है।

याचिकाकर्ता कुमारी राजनंदिनी मिश्रा की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि उसकी भाई की 2021 में हुई थी। इसके बाद उसे अनुकंपा नियुक्ति मिली थी और ट्रेनिंग पूरी करने के बाद मार्च 2022 में उसे कटनी जिले के स्लीमनाबाद के ग्राम भेडा में पटवारी के पद पर नियुक्ति किया गया था। उसी गांव में नरेंद्र जैन के नाम पर जमीन थी, जिनकी साल 2016 में मौत हो गयी थी। उनकी मौत होने के बाद उक्त जमीन उसके वारिसो के नाम पर दर्ज हो गयी थी। इसके बाद एक प्राइवेट व्यक्ति ने सीमांकन का आवेदन पर राजस्व विभाग में दिया गया था। राजस्व विभाग के द्वारा नरेंद्र जैन के नाम पर नोटिस जारी किया गया था। प्रकरण की सुनवाई के बाद नरेन्द्र जैन की अनुपस्थिति में उन्हें अवैध कब्जाधारी घोषित कर दिया।

जिसके खिलाफ उनके वारिसों ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। याचिका में आरोप लगाते हुए कहा गया था कि प्राइवेट व्यक्ति ने राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर मृत व्यक्ति के नाम पर नोटिस जारी करते हुए उसे अवैध कब्जाधारी घोषित कर दिया। हाईकोर्ट ने प्रकरण की जांच करते हुए दोषियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किये जाने के आदेश जारी किये थे। स्लीमनाबाद पुलिस ने मई 2025 को उसके सहित अन्य व्यक्तियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर लिया।

याचिका में कहा गया था कि आपराधिक प्रकरण दर्ज किये जाने के खिलाफ से उनकी तरफ से ट्रायल को कोर्ट आवेदन दायर किया था। आवेदन खारिज होने पर उसके खिलाफ अपील भी दायर की गयी थी। अपील खारिज होने के कारण उक्त याचिका दायर की गयी है। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि याचिका के साथ प्रस्तुत किये गये दस्तावेज का अवलोकन करने से स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता के खिलाफ अपराधिक कार्रवाई जारी रखना कानून की प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल होगा। साल 2018 में की गयी सीमांकन की रिपोर्ट को तैयार करने में याचिकाकर्ता की कोई भूमिका नहीं थी। घटना साल 2018 की है और याचिकाकर्ता को साल 2021 में ही अनुकंपा के आधार पर पटवारी बनाया गया था। जिस तारीख पर घटना हुई, उस समय याचिकाकर्ता नौकरी में भी नहीं था। एकलपीठ ने उक्त आदेश के साथ याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने के आदेश जारी किये है।

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