
जबलपुर। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने राज्य शासन से पूछा है कि प्राथमिक शिक्षकों को ओल्ड पेंशन स्कीम का लाभ क्यों नहीं दिया जा रहा है। शिक्षकों की याचिका पर कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव, वित्त विभाग के प्रमुख सचिव, कलेक्टर और डीईओ रीवा को नोटिस जारी किए हैं।
रीवा निवासी पंकज पांडे सहित 28 शिक्षकों ने याचिका दायर कर मप्र स्कूल शिक्षा सेवा (टीचिंग कैडर) सेवा शर्त एवं भर्ती नियम, 2018 को चुनौती दी है। याचिका में आरोप है कि इन नियमों और 27 जुलाई, 2019 को जारी कार्यपालिक निर्देशों के कारण उनकी पुरानी सेवाओं को नहीं जोड़ा जा रहा है। दलील दी गई कि याचिकाकर्ता वर्ष 1998-99 से स्कूल शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं। लंबे समय तक शिक्षा कर्मी एवं अध्यापक के रूप में सेवा दे चुके हैं। इसके बावजूद 2018 के नए नियम लागू कर उन्हें फ्रेश एंट्री यानी नए कर्मचारी की तरह माना जा रहा है। इससे उनकी वरिष्ठता समाप्त हो गई है और उन्हें नई सेवा शर्तों के तहत शामिल कर दिया गया है। याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट से मांग की है कि 2018 के नियमों और 2019 के कार्यपालिक निर्देशों को असंवैधानिक घोषित किया जाए और उन्हें पुरानी पेंशन योजना के तहत सभी लाभ तथा वरिष्ठता बहाल की जाए। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विवेक बड़ेरिया ने पैरवी की।
