हैदराबाद | आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ऑनलाइन शॉपिंग हमारी जीवनशैली का अनिवार्य हिस्सा बन गई है, लेकिन ‘बाय नाउ’ बटन दबाने और पार्सल घर पहुंचने के बीच की प्रक्रिया किसी जादू से कम नहीं है। अमेजन के वाइस प्रेसिडेंट अभिनव सिंह ने इस रहस्य से पर्दा उठाते हुए बताया कि जैसे ही ग्राहक उत्पाद चुनता है, स्क्रीन के पीछे पलक झपकते ही करोड़ों गणनाएं शुरू हो जाती हैं। एआई (AI) एल्गोरिदम तुरंत यह तय करता है कि सामान किस वेयरहाउस में है, आपकी सटीक लोकेशन क्या है और सबसे कम समय में डिलीवरी कैसे संभव है। ऑर्डर कन्फर्म होने के कुछ ही सेकंड के भीतर डिजिटल निर्देश जमीन पर तेज एक्शन में बदल जाते हैं।
ऑर्डर मिलते ही वेयरहाउस यानी फुलफिलमेंट सेंटर में गतिविधियां तेज हो जाती हैं। तकनीक के माध्यम से यह काम उस कर्मचारी को अलॉट किया जाता है जो उस प्रोडक्ट के सबसे करीब होता है। कर्मचारी हैंडहेल्ड डिवाइस की मदद से सामान उठाकर उसे पीले क्रेट में रखता है, जो कन्वेयर बेल्ट के जरिए पैकेजिंग जोन तक पहुंचता है। यहाँ एआई यह तय करता है कि सामान के लिए सबसे सटीक बॉक्स साइज क्या होगा, ताकि कागज की बर्बादी कम हो और परिवहन खर्च बचे। यह पूरी प्रक्रिया न केवल रफ्तार सुनिश्चित करती है, बल्कि बड़े पैमाने पर कुशलता और सस्टेनेबिलिटी को भी बढ़ावा देती है।
अमेजन ने साल 2013 से अब तक देश में एक विशाल डिलीवरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है, जिसमें रेलवे, इंडिया पोस्ट और खुद का एयर फ्रेट नेटवर्क शामिल है। अभिनव सिंह के अनुसार, यह सफलता केवल तकनीक की नहीं बल्कि उन हजारों प्रशिक्षित कर्मचारियों की मेहनत की है जो सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए दिन-रात काम करते हैं। जब करोड़ों आइटम और बदलती पसंद की बात आती है, तो तकनीक केवल एक जरिया है, लेकिन असली काम इंसानी नजर और समर्पण से ही संभव होता है। अगली बार जब आपका पार्सल कुछ ही घंटों में पहुंचे, तो याद रखें कि इसके पीछे डेटा, निवेश और इंसानी मेहनत का गहरा समन्वय है।

