जबलपुर:मप्र हाईकोर्ट ने पश्चिम मध्य रेलवे को निर्देशित किया है कि वह तीस दिन के भीतर राजगढ़ निवासी जितेन्द्र वर्मा (मृतक का पोता) को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करें। जस्टिस विवेक रूसिया एवं जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने रेलवे अधिकारियों ही हठधर्मिता पर दस हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। न्यायालय ने कहा है कि इस मामले में उत्तराधिकार प्रमाण पत्र भी उपलब्ध है। स्पष्ट है कि स्वर्गीय छमा बाई की अनुकंपा नियुक्ति और सेवानिवृत्ति के बकाया का दावा करने वाला कोई और नहीं है।
रेलवे पिछले दस वर्षों से इस मामले में अनावश्यक रूप से देरी कर रहे हैं। जिस कारण अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करने का मूल उद्देश्य ही विफल हो जाता है यदि सही निर्णय समय पर नहीं लिए जाते हैं।दरअसल राजगढ़ निवासी जितेन्द्र वर्मा ने केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण में याचिका दायर कर उसकी दादी की मौत के बाद अनुकंपा नियुक्ति की मांग की थी। याचिकाकर्ता के दादा का निधन 18 अगस्त 2002 को हुआ, उसके बाद उनके पिता का भी निधन 12 अगस्त 2006 को हो गया।
पालन-पोषण दादी ने किया, जो पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल डिवीजन में हेल्पर-खालसी के पद पर कार्यरत थीं। दादी का निधन 19 जून 2016 को हो गया। कैट ने 3 दिसंबर 2024 को रेलवे को निर्देश दिए थे कि याचिकाकर्ता को अनुकंपा नियुक्ति देने पर विचार करें। रेलवे ने अनुकंपा नियुक्ति देने से इनकार करते हुए कैट के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने उक्त आदेश के साथ रेलवे की याचिका निरस्त कर दी
