
जबलपुर। यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे का विनष्टीकरण से निकली राख की लैंडफिलिंग लगी रोक के आदेश को हाईकोर्ट ने अस्थाई रूप से वापस ले लिया है। सरकार के द्वारा उक्त आदेश की समीक्षा करने हाईकोर्ट में आवेदन प्रस्तुत किया गया था। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक कुमार सिंह तथा जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की युगलपीठ ने आवेदन की सुनवाई करते हुए उक्त आदेश जारी किये। युगलपीठ ने सरकार को पूर्व में पारित आदेश के अनुसार कार्यवाही करने निर्देश जारी किये है।
गौरतलब है कि साल 2004 में आलोक प्रताप सिंह ने यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के विनष्टीकरण की मांग करते हुए जनहित याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता की मृत्यु के बाद हाईकोर्ट मामले की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में कर रही है। पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से हाईकोर्ट को बताया गया था कि जहरीले कचरे का विनष्टीकरण सफलतापूर्वक पीथमपुर स्थित सुविधा केंद्र में कर दिया गया है। जहरीले कचरे से लगभग 900 मीट्रिक टन राख व अवशेष एकत्रित हुआ है। हाईकोर्ट में एक अन्य याचिका दायर करते हुए कहा गया था कि यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे की राख में रेडियो एक्टिव पदार्थ सक्रिय हैं, जो चिंता का विषय है। राख में मरकरी है, जिसे नष्ट करने की तकनीक सिर्फ जापान व जर्मनी के पास है। हाईकोर्ट ने उक्त याचिका की सुनवाई मुख्य याचिका के साथ किये जाने के आदेश जारी किये थे।
हाईकोर्ट ने 8 अक्टूबर 2025 को जारी अपने आदेश में कहा गया था कि पूर्व में पारित आदेश के बावजूद भी जहरीले कचरे की राख की लैंडफिलिंग के लिए सरकार के द्वारा दूसरे स्थान के संबंध में जानकारी नहीं दी गयी। सरकार के द्वारा इंसानों की आबादी से सिर्फ 500 मीटर दूर लैंड फिलिंग का स्थान निर्धारित किया गया है। कचरा अभी भी ज़हरीला है और प्राकृतिक आपदा के कारण उसे रोकने वाला स्ट्रक्चर ही टूट जाए या गिर जाए, तो एक और आपदा होगी। ज़हरीली राख को ऐसी जगहों पर ले जाने की संभावना पर विचार करना चाहिये जो इंसानी बस्तियों, पेड़-पौधों और पानी के सोर्स से बहुत दूर हों। हम बात से संतुष्ट नहीं है कि प्रस्तावित कंटेनमेंट स्ट्रक्चर किसी भी तरह की अचानक जियो-टेक्टोनिक एक्टिविटी से होने वाले नुकसान से पूरी तरह सुरक्षित है। ज़हरीली राख के लैंडफिलिंग की मौजूदा जगह इंसानों की आबादी के पास मंज़ूर नहीं है। जहरीले कचरे की राख की लैंडफिलिंग की सबसे अच्छी टेक्निकल एक्सपर्टीज़ पाने के लिए ग्लोबल टेंडर निकाला जाये। जिनके पास इस तरह का काम करने और ज़हरीले केमिकल कचरे को कंटेन करने के अनुभव हो, इस संबंध में जानकारी प्रस्तुत करें। इसके अलावा लैंडफिलिंग के लिए दूसरा स्थान का चयन करें।
युगलपीठ ने आवेदन की सुनवाई करते हुए अपने आदेश में कहा है कि पूर्व में पारित आदेशों के अध्ययन तथा तथ्य पहुलओं पर विचार करने के बाद हम इस निष्कर्ष पर पहुॅचे है कि 8 अक्टूबर 2025 के आदेश को अस्थाई रूप से स्थगित रखा जाये। राज्य सरकार को न्यायालय के द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति की राय के अधीन दो माह की अवधि के भीतर पूर्व में पारित आदेशानुसार विनिष्टीकरण की प्रक्रिया पूर्ण की जाये।
